आतंकी संगठनों से संबंध
अधिसूचना में कहा गया कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ जेकेडीएफपी के संबंधों को दर्शाने वाले कई इनपुट मिले हैं। जेकेडीएफपी और इसके सदस्य देश में आतंक का राज कायम करने के इरादे से हिंसक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जिससे देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डाला जा रहा है। राज्य और उसकी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां राज्य की सांविधानिक सत्ता और संप्रभुता के प्रति अनादर और अवहेलना भी दर्शाती हैं, इसलिए संगठन के खिलाफ तत्काल और शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता है।
अंकुश लगाना जरूरी
गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार की राय है कि यदि जेकेडीएफपी की गैरकानूनी गतिविधियों पर तत्काल अंकुश या नियंत्रण नहीं किया गया तो वह इस अवसर का उपयोग अपनी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को जारी रखने, जम्मू-कश्मीर के अलगाव की वकालत करने के लिए करेगी। कानून से स्थापित सरकार को अस्थिर कर भारत संघ के क्षेत्र से एक इस्लामिक राज्य बनाने के प्रयास सहित अपनी विद्रोही गतिविधियों को बढ़ाना जारी रखेगी
2019 में हुर्रियत के दो घटकों पर लगी थी पाबंदी
2019 में केंद्र ने भारत संघ से आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर को अलग करने को बढ़ावा देने के लिए हुर्रियत के दो घटकों जमात-ए-इस्लामी और जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया था। इसके साथ ही पुलवामा हमले के बाद अप्रैल 2019 में एलओसी ट्रेड को निलंबित कर दिया था। हथियारों, ड्रग तथा जाली करेंसी की तस्करी के आरोप में उड़ी के सलामाबाद तथा पुंछ के चक्का दा बाग से इसे निलंबित कर दिया था। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद लश्कर ए ताइबा के छद्म संगठन टीआरएफ पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।