जम्मू/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बैंक में पिछले दरवाजे से हुई 1256 भर्तियों के मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया। बैंक के पूर्व चेयरमैन परवेज अहमद नेंगरू ने दलील दी थी कि पहली और दूसरी एफआईआर में आरोप एक जैसे हैं, लिहाजा दूसरी एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि दोनों मामले एक दूसरे के बिल्कुल समान नहीं हैं। लिहाजा एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज की जाती है।
नेंगरू पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में 1256 पदों पर पिछले दरवाजे से भर्तियां की गईं। इसमें कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया गया। न्यायाधीश संजय धर की एकल पीठ ने कहा कि यह दोनों एफआईआर पिछले दरवाजे से हुईं भर्तियों से जरूर जुड़ी हैं लेकिन पहली एफआईआर में कुछेक पदों का जिक्र है, जबकि दूसरी एफआईआर में भर्ती के बड़े षड्यंत्र का जिक्र है। इसमें वर्ष 2011 से वर्ष 2019 तक बैंकिंग अटेंडेंट और असिस्टेंट बैंकिंग एसोसिएट्स की भर्ती शामिल है। दोनों ही एफआईआर के आरोपों को विस्तार से देखें तो याची की दलील को कहीं आधार नहीं मिलता। ऐसे में दूसरी एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता।