श्रीनगर। लैवेंडर की खेती ने जम्मू-कश्मीर में किसानों की किस्मत बदल दी है। केंद्र सरकार द्वारा 2016 में अरोमा मिशन के तहत शुरू की गई ‘पर्पल रेवोल्यूशन’ योजना से सुगंधित फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जम्मू संभाग के अलावा अब कश्मीर घाटी में भी किसान लैवेंडर की खेती में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
घाटी में कई जगहों पर लैवेंडर के बड़े-बड़े फार्म स्थापित किए गए हैं। कृषि विभाग किसानों को हर तरह की सहायता मुहैया करवा रहा है। पौधों से लेकर खाद और फसल बेचने में भी विभाग मदद कर रहा है। अब लैवेंडर की खेती करने वाले किसान इसकी पैदावार और मांग से काफी ज्यादा खुश हैं।
एक किसान अब्दुल रशीद गनई ने बताया कि लैवेंडर की खेती काफी लाभदायक है। कई चीजों में इसका उपयोग होता है। नवंबर के महीने से इसके पौधे लगाने का काम शुरू होता है। उन्होंने बताया कि लैवेंडर के तेल का प्रयोग अगरबत्ती बनाने में होता है। इसके फूलों के आसवन के बाद बनने वाले हाइड्रोसोल का उपयोग साबुन और रूम फ्रैशनर के निर्माण में किया जाता है। रशीद ने बताया कि इसकी काफी ज्यादा मांग है, जिसके चलते किसानों की अच्छी कमाई हो रही है।
सब्सिडी पर पौधे मुहैया कराता है विभाग
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबिहाड़ा के खिरम सिरहामा के एक लैवेंडर फार्म के इंचार्ज शबीर अहमद ने बताया कि यहां उन्होंने 8 हेक्टेयर में फार्म स्थापित किया है। उन्होंने फेसबुक पर लैवेंडर फार्मिंग नाम से एक पेज भी बनाया है, जिससे लोग इसकी खेती संबंधी जानकारी हासिल करते रहते हैं। विभाग की तरफ से भी उन्हें पूरी जानकारी दी जाती है। साथ ही सब्सिडी पर पौधे भी दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके फार्म में 1 लाख पौधे तैयार किये जा रहे हैं जो आने वाले समय में किसानों को बांटे जाएंगे।
एक लीटर तेल की कीमत 30 हजार रुपये
शबीर के अनुसार पहाड़ी इलाकों में लैवेंडर की अच्छी फसल होती है। इसका पौधा झाड़ की तरह होता है। बारिश कम होने पर भी टिकता है और एक बार लगाने पर 10-15 साल इसकी फसल होती है। उन्होंने बताया कि एक कनाल जमीन में इसकी 1 क्विंटल से ऊपर फसल निकलती है जिसमें से करीब एक से सवा लीटर लैवेंडर का तेल निकलता है। बाजार में एक लीटर तेल की कीमत 20 से 30 हजार प्रति लीटर है। शबीर ने बताया कि इसकी मांग होम डेकोरेशन और इत्र बनाने में होता है। माइग्रेन और डिप्रेशन की दवाएं बनाने में भी इसका इस्तेमाल होता है। उन्होंने बताया कि विभाग ने एक एक्सटेंशन विंग भी बनाया है जो मार्केटिंग का काम देखता है। आने वाले समय में और ज़्यादा किसान लैवेंडर की खेती से जुड़ेंगे।