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बीओपीईई के पूर्व अध्यक्ष पीर को 2.73 करोड़ के घोटाले में जमानत

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श्रीनगर। एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल इग्जामनेशन (बीओपीईई) के पूर्व अध्यक्ष मुश्ताक अहमद पीर को सरकारी धन के दुरुपयोग मामले में जमानत दे दी। मुश्ताक पर आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी खाते से 2.73 करोड़ अपने निजी बैंक खाते में जमाकर उनका निजी कामों में उपयोग किया था। इससे पहले क्राइम ब्रांच ने सोमवार को श्रीनगर की एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत में मुश्ताक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
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मुश्ताक को वर्ष 2012 के एमबीबीएस पेपर घोटाले में यहां की एक अदालत ने अप्रैल 2018 में दोषी ठहराया था और 16 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि उसे जम्मू-कशम्ीर व लद्दाख उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दे दी गई थी, जबकि फैसले के खिलाफ अपील लंबित थी। बीओपीईई के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ वर्ष 2017 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी है और तब से आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश सीएल बावोरिया ने कहा जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि पेश किये गए दस्तावेजों मे ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि प्राथमिकी दर्ज होने की तारीख से इस अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर करने तक, आरोपी ने अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की। इस आधार पर उसे जमानत दे दी गई।
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क्या है मामला
अपराध शाखा के अनुसार, मुश्ताक अहमद पीर ने वर्ष 2009 से 2012 तक बीओपीईई के अध्यक्ष के रूप में पदस्थ रहते हुए सरकारी 2.73 करोड़ रुपये अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिए। इस पैसे का स्मार्ट सेवर खातों में निवेश कर, नकद प्रमाण पत्र जुटाकर और अपने व्यक्तिगत ऋण की भरपाई के लिए उपयोग किया। जांच के दौरान अपराध शाखा ने पाया कि बीओपीईई अधिनियम और वित्तीय नियमों का उल्लंघन करने वाले आरोपी ने राशि का गबन किया है।
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