श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को जम्मू-कश्मीर पीएससी द्वारा संचालित जम्मू-कश्मीर वन (राजपत्रित) सेवा के रेंज अधिकारी, ग्रेड-1 वन (प्रादेशिक) के चयन के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के आदेश पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ताओं नेे चयन में महिला पुरुषों के लिए एक समान उंचाई को के प्रावधान को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने सरकार और पीएससी को नोटिस जारी कर 28 सितंबर को सुनवाई की अगली तारीख तक आपत्तियां दाखिल करने को कहा है।
उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में लगभग छह युवतियों ने 24 जुलाई 1970 के एसआरओ 359 को चुनौती दी गई थी। महिलाओं का कहना था कि चयन में महिला व पुरुष की लंबाई को एक जैसा (5 फुट 6 इंच)नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि एसआरओ महिलाओं के साथ भेदभाव करता है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 के तहत सार्वजनिक रोजगार के उनके अधिकार का भी उल्लंघन करता है।
कैट के समक्ष सरकार ने कहा था कि पद के लिए योग्यता निर्धारित करते समय नियोक्ता के रूप में, नौकरी की प्रकृति, कर्तव्यों के कुशल निर्वहन के लिए अपेक्षित योग्यता और एक की कार्यक्षमता सहित कई विशेषताओं को वह ध्यान में रख सकती है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि कई सर्वेक्षणों से पता चलता है कि जम्मू -कश्मीर में महिला की औसत ऊंचाई पुरुष की औसत ऊंचाई से कम है और इसलिए, असमान को समान मानना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नियम अप्राकृतिक है क्योंकि पुरुष और महिलाओं के शारीरिक मानक स्वाभाविक रूप से अलग-अलग हैं। यह ध्यान रखना उचित होगा कि वन विभाग, वन सेवा में पदों के लिए पुरुष और महिला के लिए निर्धारित ऊंचाई का शारीरिक मानक नियम और अन्य विभाग एक दूसरे से भिन्न हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कैट ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर जैसे पद के लिए अत्यधिक प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के लिए योग्यता मानकों के रूप में भौतिक और अन्य मानकों को तय करना सरकार की नीति है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने वर्चुअल माध्यम से महिलाओं का पक्ष रखा।