उमर अब्दुल्ला ने सवाल करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हमें अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अधिकार नहीं है। क्या हम यह नहीं कह सकते कि हम यह और वह स्वीकार नहीं करते। जब बाकी लोग कह सकते हैं तो हम क्यों नहीं।
नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को फैसला सुनाने दीजिए। हम अपनी पहचान को बचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से लड़ेंगे, चाहे कितना भी समय लगे। उन्होंने कहा कि अगर शांति भंग करनी ही होती तो 2019 के बाद करते। उत्तरी कश्मीर के राफियाबाद में आयोजित रैली में रविवार को उन्होंने ये बातें कहीं।
विज्ञापन
उमर ने कहा कि लोकतंत्र में हमें अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अधिकार नहीं है? क्या हम यह नहीं कह सकते कि हम यह और वह स्वीकार नहीं करते? जब बाकी लोग कह सकते हैं तो हम क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने अभी फैसला नहीं सुनाया है। कोई नहीं कह सकता कि फैसला क्या होगा। हो सकता है फैसला जम्मू-कश्मीर के पक्ष में हो। ऐसे में कार्यकर्ताओं को थाने बुलाने की क्या जरूरत है। शनिवार से कार्यकर्ताओं को पुलिस स्टेशन बुलाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें धमका रही है। उन्हें सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट से परहेज करने को कहा जा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर फैसला हमारे पक्ष में आएगा, तो क्या आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विरोध करने या लिखने के लिए भाजपा नेताओं को घेरेंगे? जब हमारी सरकार थी तो हमने हर क्षेत्र में विकास किया। इस मौके पर नेकां के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।