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राजोरी में भी केसर की खेती, पहले ही साल खिल गए फूल

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राजोरी। जम्मू संभाग मेें किश्तवाड़ के बाद अब राजोरी में भी केसर उगाया जा सकता है। राजोरी की जलवायु का अध्ययन करने के बाद किसान विशाल चंद्र शर्मा ने 15 मरला भूमि पर कृषि विभाग और जिला प्रशासन की मदद से केसर की खेती का प्रयोग किया, जो पूरी तरह से सफल रहा है। बीते वर्ष 2021 के अगस्त माह में बुवाई के बाद दिसंबर में फूल खिल आए। अब दूसरे किसान भी केसर की खेती के लिए इच्छा जता रहे हैं। प्रशासन भी केसर खेती को विस्तार देने पर विचार कर रहा है।
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कृषि विभाग ने पंचायत कोटधरा के एक किसान विशाल चंद्र शर्मा को केसर की खेती के लिए चुना। किसान के पास करीब 15 कनाल असिंचित भूमि है, जिसमें वह गेहूं और मक्का की फसल उगा रहा है। विशाल की 15 मरला भूमि पर केसर की खेती के प्रयोग के लिए कृषि विभाग ने कश्मीर घाटी के पांपोर से बीज खरीदा। किसान को उर्वरक, श्रम शुल्क, कीटनाशक आदि भी प्रदान किए गए। केसर की खेती में तकनीकी मुद्दा क्यारी तैयार करना है। जो किसान के लिए चुनौती थी। क्योंकि उसे पहली बार केसर उगाना था, लेकिन वह इसे पूरा करने में सफल रहा।
केसर उगाने का कोई पूर्व अनुभव न होने के कारण किश्तवाड़ के विशेषज्ञों की मदद ली गई, जिन्होंने केसर की खेती में किसान की सहायता की। बीज की बुवाई 24 अगस्त 2021 को की गई। बुवाई के 3-4 दिन बाद 28 दिन तक भारी बारिश हुई, जिससे अंकुर प्रभावित हुआ और उसमें देरी हुई। वहीं 12 दिसंबर 2021 को खिलना शुरू हुआ और उसी दिन फूल खिले। 15 दिन तक फूल खिलने की प्रक्रिया जारी रही, जिसके परिणामस्वरूप कुल 734 फूल और औसतन 45-50 फूल प्रतिदिन आए। फूलों का तुड़ान भी साथ-साथ किया गया। तुड़ान के दूसरे दिन स्टिगमा को फूलों से अलग कर दिया गया। विशाल ने बताया कि फूलों की भीनी सुगंध से उसका उत्साह और बढ़ गया है। आसपास के क्षेत्र के किसानों ने भी केसर की खेती के लिए इच्छा जताई है। अब कृषि विभाग और किसान के सामने भविष्य की खेती के लिए बीज के संरक्षण की चुनौती है। किसान विशाल चंद्र ने कहा कि इस क्षेत्र में केसर की खेती के लिए प्रेरित करने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग के आभारी हैं।
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पांपोर, बडगाम, श्रीनगर और
किश्तवाड़ तक सीमित है खेती
केसर की खेती लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित है। मुख्य रूप से पांपोर, बडगाम, श्रीनगर और किश्तवाड़ जिले हैं, लेकिन केसर की खेती के परीक्षण के सफल संचालन के बाद जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी खेती का विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं।
किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें सामान्य कृषि से व्यावसायिक कृषि के लिए प्रेरित किया जा सके और इस संबंध में ठोस उपाय किए जा रहे हैं। केसर की खेती का परीक्षण इस दिशा में सिर्फ एक और कदम है और निकट भविष्य में किसान समुदाय के कल्याण के लिए और भी बहुत कुछ आने वाला है।
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-विकास कुंडल, डीसी
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