खुले आसमान के नीचे बैठकर बच्चे करते हैं पढ़ाई
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राजोरी। कोटरंका शिक्षा जोन के मिडिल स्कूल कांधरा को करीब 52 साल पहले वर्ष 1970 में स्थापित किया गया। पांच दशक बीत जाने के बाद भी स्कूल को भवन नसीब नहीं हो पाया है। आज भी बच्चे किराए के एक कमरे में और खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
बुद्धल न्यू ब्लॉक के कांधरा में वर्ष 1970 में प्राइमरी स्कूल खोला गया। करीब 46 वर्ष बीत जाने के बाद वर्ष 2006 में लोगों की मांग को देखते हुए उसे मिडिल स्कूल बना दिया गया। स्कूल का भवन बनाने व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग को याद ही नहीं रहा। स्थानीय लोगोें व अभिभावकों ने रोष प्रकट करते हुए बताया कि स्कूल में मौजूदा समय में 150 के करीब विद्यार्थी हैं, लेकिन मात्र एक किराए का कमरा है। जहां हेडमास्टर का कार्यालय का काम होता है, और बच्चों के बैठने के लिए एक भी कमरा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते बच्चों को कभी यहां कभी वहां खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई कराई जाती है। बारिश या तेज धूप हो या तो बच्चों को छुट्टी कर दी जाती है, या बच्चों को आगे पीछे कहीं पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाया जाता है। इसके चलते जहां एक तरफ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को शिक्षा प्रदान करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी एवं अभिभावकों मोहम्मद याकूब, यासीन अहमद, बशारत अहमद, अब्दुल रशीद आदि ने बताया कि कई बार इस संबंध में शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन, विभिन्न सियासी पार्टियों के नेताओं से भी भवन के लिए मांग की है, लेकिन हर किसी ने केवल आश्वासन ही दिया है और बच्चों को भवन प्रदान करने के लिए किसी ने कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया। इसके चलते उन्हें लगता है कि उनकी बच्चों का भविष्य अंधकार में ही चला जाएगा। वहीं अभिभावकों ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही प्रशासन व संबंधित विभाग ने बच्चों के भवन के लिए ठोस कदम नहीं उठाया तो वह लोग सड़क पर उतरकर प्रदर्शन का सहारा लेंगे।
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क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में जेडईओ अलफ़दीन ने बताया कि वर्ष 2012-13 में स्कूल भवन का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन प्लंथ भरने के बाद उक्त इलाके में आई बाढ़ में जमीन का वह हिस्सा ढह गया था। जेडईओ ने माना कि जिस किराए के भवन में पहले स्कूल था वह भी अब बेहद खस्ता हालत में था, जिसके चलते उस बिल्डिंग के मालिक ने भी उसको गिराकर नया भवन निर्माण का काम शुरू कर दिया है। अब बच्चों के पास सच में खुले आसमान के नीचे बैठने के सिवाय कोई चारा नहीं है। जेडईओ ने बताया कि शिक्षा विभाग ने सेना से संपर्क करके टेंट आदि का बंदोबस्त करने का आह्वान किया है ताकि जब तक भवन निर्माण होता तब तक बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में दिक्कतें कम हो सके।