कठुआ। जिले के सबसे ज्यादा फसल उत्पादक अंधड़ क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। हालात यह है कि छह हजार कनाल रकबे में बीस फीसदी फसल जैसे तैसे रोपी गई थी, वह भी सूखने के कगार पर है। वहीं, 80 प्रतिशत इलाके में सिंचाई के अभाव में अब तक फसल रोपी ही नहीं जा सकी है। ऐसे ही हालात खोख्याल के साथ सैदपुर, नडोली, सैंपर सपला, आदि में भी बने हुए हैं। इस कारण किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साथ देखी जा सकती हैं।
खोख्याल निवासी किसान देवी सिंह के मुताबिक सिंचाई की जरूरत पूरी न होने के कारण धान की खेती करने वाले क्षेत्र में अब तक 20 प्रतिशत भी धान की रोपाई का काम नहीं हो पाया है। इलाके में ज्यादातर किसान नहर के पानी पर ही आश्रित हैं, जिसमें अब तक पानी नहीं आया। करीब पांच हजार की आबादी वाली पंचायत में रहने वाले 90 प्रतिशत लोगों के भरण पोषण का साधन खेती ही है, जोकि इस सीजन में पंचायत के छह हजार कनाल कृषि रकबे पर धान की खेती करते हैं। लेकिन, नहर के पानी से सिंचाई के अलावा कोई अन्य विकल्प न होने के कारण उन्हें नुकसान हो रहा है।
गांव के ही किसान हजारा सिंह का कहना है कि क्षेत्र में 20 प्रतिशत किसानों ने अपनी फसल की सिंचाई के लिए बिजली से चलने वाले पंपसेट लगाए हैं, लेकिन वह भी कम वोल्टेज के कारण सिंचाई कर पा रहे हैं। ऐसा ही हाल आसपास के अन्य गांवों में है, जिससे धान की रोपाई का काम पिछड़ता जा रहा है।
नहर में पानी न आने से किसान चिंतित
किसान प्रहलाद सिंह का कहना है कि एक ओर सरकार किसानों की आय को दोगुना करने की बात कर रही है, वहीं इससे संबंधित विभाग लगातार किसानों की अनदेखी कर रहे हैं। हर साल उनके गांव में 15 जून तक नहरों का पानी आ जाता था, लेकिन इस बार सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें आज तक सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला। करीब एक दशक पूर्व गांव में चेक डैम का निर्माण शुरू होने पर बताया गया था कि इसके निर्माण से गांव में किसानों को सिंचाई की सुविधा का लाभ मिलेगा। लेकिन, उसका काम भी अब तक अधूरा पड़ा है। गत दिनों गांव के युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों की इस समस्या को उपराज्यपाल तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
...........
कोट
कठुआ खड्ड में नियमित रूप से सिंचाई का पानी छोड़ा गया है। फिर भी अगर किसी इलाके में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, तो इसके लिए अधीनस्थ कर्मचारियों को भेजकर जांच करवाई जाएगी।
- अनिल गुप्ता, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग