किसानों के संघर्ष में साथ निभाने का एंलान करते विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता। संवाद
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कठुआ। किसानों से सरकारी भूमि खाली कराने की शुरू प्रक्रिया का विरोध कर रहे प्रभावितों का हर तरह से समर्थन करने का शहर के विभिन्न संगठनों ने ऐलान कर दिया है। रविवार को राजपूत सभा में आयोजित बैठक के उपरांत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने किसानों से भूमि को वापस लेने लिए शुरू हो रही प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक बताते हुए किसानों के समर्थन में होने वाले हर आंदोलन में उनका साथ देने की बात कही।
बैठक के उपरांत आईडीपी के आईडी खजूरिया ने कहा कि किसान जिस जमीन पर खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उक्त जमीन वर्ष 1971 से पहले किसी जंगल से कम नही थी। किसानों ने इसे कड़ी मेहनत कर खेती के योग्य बनाया है। जिसे अब वापस लेने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जम्मू कश्मीर ही एक मात्र स्थान है जहां लोगों को झुग्गी-झोपड़ी में अपने परिवार के साथ गुजारा नही करना पड़ता है। जिसका मुख्य कारण अब यहां पर रहने वाले हर परिवार के पास अपनी जमीन थी। लेकिन अब यहां भी ऐसा महौल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज जम्मू कश्मीर में चुनी हुई सरकार नही है। यहां सरकार के काम काज का कार्यभार उपराज्यपाल निभा रहे है। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी जन विरोधी कार्रवाई के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ही जिम्मेदार है। क्योंकि उपराज्यपाल उनके ही प्रतिनिधि हैं। इसलिए अगर जम्मू कश्मीर में लोगों के साथ कुछ भी ऐसा हो रहा है तो उसके लिए केंद्र सरकार की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लगना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि जमीन को वापस लेने के लिए होने वाला हर संघर्ष किसानों का अपना संघर्ष है। जिसका वह हर तरह से समर्थन करने के लिए तैयार हैं। लेकिन नेतृत्व किसानों का ही होगा वह जो भी निर्णय लेते हुए संषर्घ उसी तरह से ही चलेगा।
इस मौके पर जितेंद्र सिंह पप्पू, एडवोकेट सुशील गुप्ता, राबिन शर्मा, घनश्याम, योगराज, तरसेम पाल सैनी, कनव शर्मा आदि उपस्थित रहे।