कॉलेज रोड स्थित दुकान से पतंगे खरीदते युवा। संवाद
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कठुआ। जिले में हर साल बसंतपंचमी पर कठुआ शहर का आसमान रंग बिरंगी पतंगों से पट जाता है। इस बार बसंत पंचमी पांच फरवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन शहर में सबसे अधिक पतंगों और डोर का कारोबार भी होता है। लेकिन इस बार व्यवसायी कारोबार में कोरोना के चलते मंदी की मार बता रहे हैं। बसंत पंचमी से सप्ताह भर पूर्व ही शहर में पतंगों की बिक्री और उड़ाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस बार भी बसंत पंचमी पर होने वाली पतंगबाजी का शहर में दौर शुरू हो चुका है। जिसके चलते सुबह से ही आसमान पर रंगबिरंगी पतंगों का नजारा देखने को मिलने लगा है। घर की छतों से पतंगबाजी का लुत्फ ले रहे युवा और बच्चों की ये काटा, वो काटा की आवाज सुनना आम हो गया है।
सप्ताहांत बंदी के बीच घर पर समय व्यतीत कर रहे बच्चे पतंगबाजी का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। पतंगबाजी का शौक रखने वालों की ओर से अभी से पतंगबाजी शुरू किए जाने के कारण शहर में पतंग और डोर का कारोबार भी बढ़ रहा है। वहीं, प्रतिबंधित चीन निर्मित डोर का कारोबार भी चरम पर है। कई बार बड़ी दुर्घटनाओं को अंजाम देने वाली चीन निर्मित डोर का पतंगबाजी में इस्तेमाल प्रतिबंधित होने के बावजूद अब तक बंद नहीं हुआ है। पतंगों के कारोबार की आड़ में चोरी-छिपे इस प्रतिबंधित डोर को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। पिछले कुछ सालों के दौरान प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाईयों के डर से कई दुकानदार चोरी-छिपे प्रतिबंधित चीनी डोर की बिक्री कर रहे हैं। ग्राहक की डिमांड के अनुसार उन्हें दिया जाता है। पतंगबाजी का शौक रखने वाले अभिनंदन शर्मा की माने तो हर साल केवल मकर संक्रांति पर ही जमकर पतंगबाजी देखने को मिलती थी। लेकिन कोरोना के कारण स्कूलों और कॉलेजों के बंद रहने से इस बार मकर संक्रांति से ही शहर में पतंगबाजी शुरू हो गई है, जिसमें चीन निर्मित डोर का इस्तेमाल भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि चीन निर्मित डोर से पतंगबाज के हाथ कट जा रहे हैं। साथ ही पक्षी और आम लोगों के घायल होने की भी आशंका बनी रहती है। प्रशासन से सख्ती से इस दिशा में कार्रवाई की मांग उठाई गई है।