कठुआ। वर्ष 1947 में पाकिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए लोगों ने सरकार से उनका हक देने की मांग की है। बुधवार को शहर से सटे गांव लच्छीपुर में 1947 रिफ्यूजी एक्शन कमेटी की बैठक का आयोजन हुआ। इसमें कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गुरदेव सिंह ने लोगों की समस्याएं सुनीं और सरकार के सामने उन्हें रखने का आश्वासन दिया।
इस मौके पर हरजीत सिंह ने कहा कि देश के बंटवारे के वक्त अपना सब कुछ पाकिस्तान में छोड़कर खाली हाथ आए लोगों को जम्मू कश्मीर में शरण दी गई थी। लेकिन, 70 साल में इन शरणार्थियों को उनके जायज हक आज तक नहीं दिए गए हैं। जिसके चलते इस वर्ग को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने 1947 के सभी साथियों को पुनर्वास के लिए 25 लाख रुपये देने की बात कही थी। पांच अलग-अलग किस्तों में मिलने वाली राशि अब तक शरणार्थियों तक नहीं पहुंची है।
उन्होंने कहा कि शरणार्थियों को पुनर्वास के तौर पर उनकी बस्तियों से 10-10 किलोमीटर दूर जीविका चलाने के लिए जमीन दी गई थीं। लेकिन, उसका भी आज तक कब्जा नहीं मिला। हालांकि, बहुत से शरणार्थी अलग-अलग रोजगार कर अपने परिवार की रोजी रोटी चला रहे हैं। लेकिन, इनमें से काफी शरणार्थी ऐसे भी हैं, जो सरकार को ओर से दी जाने वाली राहत की प्रतीक्षा में हैं। इसलिए, राहत राशि के वितरण में आ रही बाधाओं को दूर किया जाए।