बसोहली। बसोहली में कचरा निस्तारण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। दशकों तक कठुआ में चलती रही खुले में कचरा फेंकने की प्रथा पर अब बसोहली नगर कमेटी भी चल पड़ी है। बीएसएनएल एक्सजेंच के पास कस्बे का सारा कचरा फेंका जा रहा है, जिस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी आंखें मूंद रखी हैं।
हालांकि कठुआ नगर परिषद को तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मोटा जुर्माना लगा दिया है, लेकिन बसोहली के पर्यावरण की बर्बादी पर कोई ध्यान नहीं दिया है। हैरत की बात है कि बड़े पैमाने पर फेंके जा रहे कचरे से नगर कमेटी ने भी पल्ला झाड़ लिया है।
बसोहली-बनी सड़क पर बीएसएनल एक्सचेंज से सटी करीब एक कनाल ढलान भूमि पर कचरा इस कदर फैला हुआ है कि कई वर्षों से यहां सफाई नहीं की गई हो। दरअसल बीएसएनल एक्सचेंज से सटे इस स्थान पर नगर कमेटी का एक साइन बोर्ड भी लगा है, जिस पर लिखा गया है कि यहां कचरा फेंकना सख्त मना है है, जो भी कचरा फेंकता पाया गया उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन लोगों इसे नजरअंदाज कर देते हैं। गंदगी से उठने वाली दुर्गंध ने नाक में दम कर रखा है और बीमारियां फैलने का भी डर बना है।
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कचरा कौन फेंक रहा नगर कमेटी को पता नहीं
नगर कमेटी के अध्यक्ष सुमेश ने कहा कि यहां कचरा कौन फेंक रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। नगर कमेटी यहां कचरा नहीं फेकती है। उन्होंने बताया कि बस अड्डे पर स्थित दुकानदारों को भी यह कहा गया था कि कचरा केवल कूड़ेदान में डालें। अगर उक्त स्थान पर कचरा कोई फेंकता पाया गया है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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लोग बोले, पॉलिथीन पर
रोक तो कैसे हो रहा प्रयोग
स्थानीय निवासी राहुल कपूर, सुनील कुमार, रविंद्र मदील आदि ने बताया कि अब सवाल यह कि आखिर इतना कचरा कहां से आ रहा है और इस कचरे में सबसे ज्यादा पॉलिथीन शामिल है, जिसे खाकर मवेशियों की भी जान चली जा रही है। नगर कमेटी दावे करती है कि पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन पॉलीथिन का प्रयोग बदस्तूर जारी है। जितना एनटी पॉलीथिन ड्राइव चलाकर जब्त किया जाता है, उससे ज्यादा इस कचरे के ढेर पर देखने को मिलेगी। यह भी नगर कमेटी की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगाता है।
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स्वच्छ भारत मिशन पर लगा
प्रश्नचिह्न, झील भी हो रही दूषित
बसोहली प्रशासन और नगर कमेटी का दावा है कि बसोहली नगर पूरी तरह से स्वच्छ है, लेकिन जमीनी हकीकत बीएसएनएल एक्सचेंज के पास फैली गंदगी बयां करती है। प्रशासनिक और नगर कमेटी कार्यालय से मात्र दो किलोमीटर दूर एक कनाल भूमि में फैली गंदगी स्वच्छ भारत अभियान पर भी सवाल खड़े कर रही है। जिसकी अधिकारियों को परवाह नहीं। वहीं रंजीत सागर झील में भी यह कचरा समाहित होता है जो पानी को दूषित कर रहा है हालांकि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बीते तीन वर्षों से कार्रवाई चल रही है, जो आज तक पूरी नहीं हो पाई है।