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सरकारी बैंकों के निजीकरण का किया विरोध

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बैंकों के निजीकरण के विरोध में हड़ताल के दौरान नारेबाजी करते बैंककर्मी। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। देश के सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल के चलते जिला के राष्ट्रीयकृत बैंकों में काम काज ठप रहा। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ के आह्वान पर हड़ताल के दौरान यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के बैनर तले शहर के भारतीय स्टेट बैंक की शहीदी चौक शाखा में जमा हुए बैंक कर्मियों ने इसके विरोध में जोरदार नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से का इजहार किया।
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प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मियों का नेतृत्व कर रही एसबीआई आफिसर एसोसिएशन की रीजनल सेक्रेटरी दीप्ति भगत ने कहा कि सरकारी बैंकों का निजीकरण कर सरकार कॉर्पोरेट पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती हैं। इसके विरोध में अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। जिसका उनकी यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस भी समर्थन करते हुए हड़ताल में शामिल हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इस हड़ताल में पूरे देश के लाखों बैंककर्मी शामिल होकर इसकेेेेेेेेेेेेे खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंक आम नागरिकों को सस्ती बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराते हैं। इन बैंकों का निजीकरण होने से जहां एक ओर लोगों को महंगी बैंकिंग सेवाएं मिलेगी। साथ ही इसका रोजगार पर भी बुरा असर पड़ेगा। वहीं प्रदर्शन में शामिल मनोज कुमार ने कहा कि पूरे देश में सरकार की जनधन योजना में जीरो बैलेंस अकाउंट खोलने वाले सरकारी बैंकों का निजीकरण देश के गरीब और अल्प आय वाले नागरिकों को बैंकिंग की सुविधा से अलग करने की साजिश है। उन्होंने का कि सबसे कम जमा राशि के आधार पर लोगों को अपना खाता संचालित करने की सुविधा देने वाले बैंकों का निजीकरण दुर्भाग्यपूर्ण है। जिसका वह विरोध करते हैं। प्रदर्शन में संजीव कुमार, जीत कुमार, प्रवीण कुमार, रश पाल सिंह, रविंद्र कुमार, जुगल किशोर आदि विभिन्न बैंकों के कर्मी शामिल रहे।
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