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Kathua News: एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन लिए जाने का किसानों ने किया विरोध

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एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन लिए जाने का विरोध करते किसान। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बेघर हो रहे तरफ मंझली के लोगों ने प्रशासन से उनकी सुध लिए जाने की मांग की। रविवार को स्थानीय ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी करते विकास के नाम पर उनकी जमीन लिए जाने को नाइंसाफी करार देकर अपना रोष जताया।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल दर्शन कुमार ने बताया कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के नाम क्षेत्र के किसानों से उनकी जमीन जबरिया ली जा रही है। किसानों की जमीन, जिसे सरकारी बता कर लिया जा रहा है। उसे पिछले सत्तर साल की मेहनत के बाद लोगों ने खेती योग्य बनाया था। इस जमीन में लोगों ने अपने पैसे खर्च कर सिंचाई के लिए बोर करवाया है। आलमदीन ने बताया कि पहले एक्सप्रेस-वे के लिए 150 फीट जमीन लिए जाने की जानकारी दी गई थी। जिसे बाद में बढ़ा कर 180 फीट किया गया, अब 200 फीट जमीन को लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इलाके में किसानों के पास जो भी जमीन है वह उन्हें अलाट की गई थी। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सरकार ने उनकी गिरदावरियों को निरस्त कर दिया। जिसमें प्रभावशाली लोगों को तो बचा दिया गया, जबकि गरीबों को कुछ भी नहीं मिला है। अब एक्सप्रेस-वे के नाम पर जमीनों को जिस तरह से सरकार उनसे ले रही है, वह विकास ने नाम पर उन्हें बेघर किया जाना है। जिसका वह लोग विरोध करते हैं। मोहम्मद रफीक ने बताया कि सात दशक से जमीन को अपने खून से सींचने वाले लोगों को आज तक पता नहीं चल पाया है कि उनसे कितनी जमीन ली जा रही है। किसानों की अनुपस्थिति में आने वाले राजस्व कर्मचारी कहीं भी आकर उनकी जमीन में निशान लगाकर चले जाते हैं। जिसका उन्हें कोई मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा राजस्व रिकार्ड से छेड़छाड़ कर उन किसानों को भी उनकी जमीन से बेदखल करने की साजिश को अंजाम दिया जा रहा है, जो कई पीढ़ियों से उनकी मिलकियत है। किसान प्रवीण सिंह ने कहा कि जिस जमीन के सहारे लोग सत्तर साल से अपने परिवार का भरण पोषण करते आ रहे हैं, अगर सरकार इस तरह से उनसे छीन लेती है तो वह लोग कहां जाएंगे। लिहाजा सरकार और प्रशासन एक्सप्रेस का निर्माण करने से पहले इससे विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास का प्रबंध करें।
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