कठुआ। जिले में अवैध कॉलोनियां धड़ल्ले से काटी जा रही हैं, लेकिन भू-माफिया पर विभागीय अधिकारी शिकंजा कसने में विफल साबित हो रहे हैं। खास बात यह है कि यह अवैध कारोबार कोरोना महामारी के दौरान और भी तेज हो गया है। उधर, 14 जनवरी को प्रदेश प्रशासन की ओर से लागू किए गए नए भूमि इस्तेमाल कानून के बाद भी इन अवैध कॉलोनियों पर धड़ल्ले से पंजीकरण जारी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनवरी माह में कोरोना महामारी के चलते पंजीकरण की प्रक्रिया जहां आम लोगों के लिए बंद थी, वहीं भू माफिया ने राजस्व विभाग की मिलीभगत से भी कई जगह पंजीकरण करवाए हैं। प्रशासन की ओर से कोई भी कार्यवाई न किए जाने की वजह से बड़े पैमाने पर शहर, आसपास और ग्रामीण इलाकों में कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां बेचकर भू माफिया करोड़ों की कमाई कर रहा है। बता दें कि कृषि भूमि को व्यवसायिक इस्तेमाल से पहले जिला उपायुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष आवेदन करना पड़ता है। यही नहीं इसके लिए पांच फीसदी तक फीस भी चुकानी पड़ती है। इसके लिए 14 जनवरी से जहां नया भूमि इस्तेमाल कानून सामने आ गया है वहीं हाल में बेची गई जमीनों पर इस कानून को लागू होने से बचाने के लिए भू माफिया भी इन दिनों प्रशासन के चक्कर लगा रहा है। शहर में प्रापर्टी डीलरों के साथ राजस्व विभाग की मिलीभगत का खुलासा पहले भी कई बार हो चुका है। जहां राजस्व अधिकारी एक बार रेस्त्रां में सरकार दस्तावेजों के साथ देखे जा चुके हैं, वहीं जिला प्रशासन भी प्रापर्टी डीलरों पर नकेल कस चुका है। लेकिन बीते दो वर्षों से जिले में हालात बद से बद्तर हो चुके हैं। सब नियमों को ताक पर रखकर पिछले डेढ़ साल में एक दर्जन से भी ज्यादा ऐसी अवैध कॉलोनियां विकसित हो गई हैं और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी है। बड़े पैमाने पर कृषि जमीनों को गैर कृषि उपयोग के लिए कॉलोनियों में काटकर इस्तेमाल किया गया है। यही नहीं इन्हें बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। खरीदारों को छोटे छोट भागों यानि पंद्रह मरले में इन जमीनों का पंजीकरण करवाने को कहा जा रहा है ताकि भू माफिया की करतूतों को छुपाया जा सके। राजस्व विभाग के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि हाल में दो बैठकें कर फील्ड स्टाफ को हिदायतें दे दी गई हैं। कुछ मामले संज्ञान में आ रहे थे जिनपर नकेल कसी गई है। समाज सेवी शशि शर्मा ने कहा कि हाल में शहर के वार्ड 12 से भी लोग कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। राजस्व विभाग और नगर परिषद जहां इसमें संलिप्त है वहीं पुलिस ऐसे लोगों को संरक्षण देने का काम कर रही है। जिसपर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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प्रशासनिक आदेश के बाद विभागीय अधिकारियों में मची खलबली
भूमि इस्तेेमाल को लेकर सरकार के नए निर्देश के बाद माफिया भी कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने लगा है। अवैध कालोनियों का मामला शहर में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। भू-माफिया नगर परिषद और योजनाकर विभाग को भरोसे में लेकर यह काम कर रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नियमों को ताक पर रखकर शहर में कई लोगों के नक्शे पिछले कुछ समय में पास किए जा रहे हैं। दर्जनों अवैध निर्माण किए गए हैं जिसपर प्रशासन की ओर से कोई भी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई है।
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भूमि इस्तेमाल को लेकर मामले सामने आ रहे हैं। कई काम रुकवाए गए हैं। जिन जमीनों का इस्तेमाल गैर कृषि प्रयोग के लिए किया जाना है, उसके लिए आवेदन कर अनुमति हासिल की जा सकती है। अनुमति मिलने के बाद फीस चुकाई जा सकती है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए जा चुके हैं।
विक्रम कुमार
तहसीलदार कठुआ
शहर में निर्माण योजना मंजूरी के बाद ही निर्माण की इजाजत दी जाती है। फिलहाल अवैध निर्माण या भूमि इस्तेमाल के संबंध में कोई भी शिकायत नहीं मिली है। राजस्व विभाग की ओर से जमीनों को व्यवसायिक या कृषि भूमि चिह्नित किए जाने के बाद ही इसपर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
दिलीप अबरोल
सीईओ नगर परिषद कठुआ