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बारिश और तेज हवाओं से फसल, बिजली और पानी व्यवस्था ध्वस्त

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भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हुआ बसोहली के रंजीत सागर झील स्थित जलशक्ति विभाग का फ्लोटिंग स्टे? - फोटो : KATHUA
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कठुआ/बसोहली। सोमवार सुबह जिले के कई इलाकों में बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने काफी नुकसान पहुंचाया है। इस बारिश ने लोगों को सुहावने मौसम का एहसास तो कराया, लेकिन बदले में बिजली और पीने के पानी से वंचित किया।
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शीतलनगर के नजदीक 33केवी लाइन में फॉल्ट के चलते बनी सब डिवीजन की बिजली लगभग छह घंटे तक प्रभावित रही। उधर, कठुआ के कंडी इलाके से खड़ी फसलों को हुए नुकसान की जानकारी मिली है। वहीं, बसोहली कस्बे को पेयजल सप्लाई के लिए रंजीत सागर झील में स्थापित बेड़ा तेज हवाओं के चलते झील की लहरों की चपेट में आ गया। इससे बेड़े पर लगी मोटर तो बच गई, लेकिन पाईपों को काफी नुकसान पहुंचा है। देर शाम तक इसकी मरम्मत कर ली गई है। इस दौरान कस्बे की पेयजल सप्लाई प्रभावित रही।
सोमवार सुबह 10 बजे के लगभग काली घटाओं ने आसमान को घेरा। जिसके बाद तेज हवाओं के साथ ही बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। मैदानी और पहाड़ी इलाकों में बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन, बसोहली और शीतलनगर के इलाकों में तेज हवाएं चलीं। इस दौरान बसोहली-बनी 33केवी लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। सुबह 11 बजे के लगभग एक बड़े इलाके की बिजली गुल होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया। इसके बाद बनी में शाम पांच बजे के लगभग बिजली बहाल हो पाई।
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उधर, बसोहली में मौसम बदलने के बाद ठंडक का भी एहसास होने लगा है। हालांकि, इस दौरान हुई तेज बारिश और हवाओं से जल शक्ति विभाग के फ्लोटिंग ढांचे को नुकसान पहुंचा है। तेज बारिश से रंजीत सागर झील में तेज लहरें उठीं। इससे रंजीत सागर झील में बोटिंग प्वाइंट के नजदीक जलशक्ति विभाग के फ्लोटिंग ढांचे की सुरक्षा के लिए लगाई गई रस्सियां तक टूट गईं। इसके पाइप भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। विभाग के कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से इस फ्लोटर को रस्सियां डालकर नियंत्रित किया। हालांकि इसमें लगाई गई मोटर व अन्य उपकरण ठीक है। फ्लोटिंग ढांचे को ठीक करने का कार्य देर शाम तक जारी रहा।
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तेज हवाओं व बारिश से विभाग के फ्लोटिंग ढांचे में स्थित चार पाइपों को क्षति पहुंची है। चार इंच के 10 फुट लंबे चार पाइप ढांचे से निकल गए हैं। फ्लोटर में लगाए गए अन्य पाइपों की वजह से फ्लोटर सुरक्षित था। पाइपों के टूट जाने के बाद वह पूरी तरह असुरक्षित हो चुका था। जलाशय की तेज लहरों में वह इस तरह डगमगा रहा था, मानो पानी में बह जाएगा। देर शाम तक इसे सुचारु कर लिया गया।
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- अनूप शर्मा, जेई, मेकेनिकल विंग, जल शक्ति विभाग

भारी बारिश के चलते हीरानगर क्षेत्र में गिरी धान की फसल, संवाद।- फोटो : KATHUA

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