कठुआ। जीएमसी कठुआ की माइक्रो बायोलाजी लैब में एक साल की अवधि से कुछ दिन पहले एक लाख से अधिक जांच के आंकड़े को पार कर लिया गया है। साल भर पहले इस प्रयोगशाला को कोरोना के बढ़ते मामलों और जिला स्तर पर ही जांच की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय किया गया था।
वर्तमान में यह प्रयोगशाला कठुआ और सांबा दोनों जिलों के लिए जांच प्रक्रिया को जारी रखे हुए है। वहीं लखनपुर कॉरिडोर के जरिए प्रदेश में दाखिल होने वाले लोगों की जांच भी आरटीपीसीआर लैब में की जा रही है।
जीएमसी कठुआ में 19 अगस्त 2020 को आरटीपीसीआर परीक्षण शुरू हुआ था। जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा स्थापित सभी नए मेडिकल कॉलेजों में से सबसे पहले आरटीपीसीआर प्रयोगशाला जीएमसी कठुआ में स्थापित की गई थी।
गौरतलब है कि जीएमसी प्रधानाचार्य डॉ. अंजलि नादिर भट के निरंतर प्रयासों से अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू आईएएस के संरक्षण में आरटीपीसीआर प्रयोगशाला की स्थापना की गई है।
माइक्रो बायोलाजी लैब के प्रभारी, सहायक प्रोफेसर डॉ. अमरीश कोहली ने कहा कि इस तरह की महामारियों के दौरान वायरल अनुसंधान और प्रबंधन के क्षेत्र में यह बड़ा कदम साबित हुआ है। आरटीपीसीआर प्रयोगशाला शुरुआत से ही दिन-रात अथक रूप से काम कर रही है और कम से कम समय में परिणामों की रिपोर्ट कर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।