कठुआ/बिलावर/बसोहली। अल्लाह के घर में नमाज के लिए खड़े होने पर न कोई मेहमान रहता है और न कोई मेहमान नवाजी करने वाला। शुक्रवार को दूसरे जुमे के फर्जांदाने तौहीद ने हजारों की तादाद में मिलकर नमाज अता की। खुदा की दरगाह पर अमन और सुकून की दुआ के लिए हजारों हाथ एक साथ उठे। शहर की जामा मस्जिद में इमाम जकरिया ने नमाजियों को नमाज
अता करवाई।
वहीं रमजान के मुकद्दस महीने का पैगाम समुदाय के लोगों तक पहुंचाते हुए कहा गया कि रमजान इंसान को इंकसारी, इंसानियत और मुहब्बत का दर्फ देता है। रोजा सिर्फ पेट को भूखा रखने का नाम नहीं, बल्कि जिस्म के हर हिस्से का रोजा होना चाहिए। मुराद यह है कि आंख से गलत देखा न जाए, जुबां से गलत बोला न जाए, हाथ से गलत काम न किया जाए और कदम गलत राह की ओर न बढ़ें। उन्होंने कहा कि हर मुस्लिम को अपना फर्ज अता करना जरूरी है। इस मौके पर बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने शिरकत की।
वहीं बिलावर में रमजान के दूसरे जुमे को तहसील के विभिन्न भागों से आए हुए सैकड़ों नमाजियों ने जामा मस्जिद में नवाज अता कर अमन की दुआ की। खुशहाली के लिए दुआ की। मस्जिद के मौलाना अख्तर हुसैन सद्धिकी ने नमाजियों को माहे रमजान के बारे में विस्तार से बताया।
बसोहली में मौलवी उस्मान ने नमाजियों से कहा कि अल्लाह के बताए नेकी और शांति के मार्ग पर चलकर ही सुख की प्राप्ति हो सकती है। वहीं नगरोटा, पूंड, हट्ट, नगांली आदि गांवों में भी जुमे की नमाज अदा की गई।