आईआईटी जम्मू जल्द ही टिंकर्स लैब स्थापित करेगा। इसके लिए मेकर भवन फाउंडेशन (एमबीएफ) और यूपीएल लिमिटेड के साथ करार किया गया है। यह लैब छात्रों के मन में नए विचारों का पता लगाने, हाथ से टिंकर करने, नवाचार और उत्पाद विकास भावना को विकसित करने के लिए सक्षम है।
जनवरी 2022 तक इस लैब को शुरू किए जाने की उम्मीद है। इसका निर्माण 1800 स्क्वायर फीट क्षेत्र में किया जाएगा। प्रदेश के छात्रों के लिए यह लैब दिन-रात खुली रहेगी। इस लैब में बिजली, यांत्रिक उपकरणों के नवीनतम वर्क स्टेशन के साथ लेजर कोडिंग, सीएनसी मशीन, 3डी प्रिंटर, फैब्रिकेशन इत्यादि सुविधाओं के लिए यूपीएल और एमबीएफ ने साथ मिलकर एक करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।
जम्मू-कश्मीर में इस तरह की लैब खोलने की पहल पहली बार की जा रही है। यूपीएल के कार्यकारी निदेशक विक्रम श्राफ ने इस कार्यक्रम में सहयोग के लिए संस्थान को प्रेरित किया है। यूपीएल कंपनी के पास भारत का पहला पेटेंट है। इस पेटेंट को 90 के दशक में ईएमआर के नाम से जाना जाता था।
उन्होंने बताया कि इस साल बौद्धिक संपदा संबंधित कंपनी ने कई पुरस्कार भी जीते हैं। कैलिफोर्निया स्थित चेरिटी मेकर भवन फांउडेशन के सहसंस्थापक रुयिनतन मेहता ने बताया कि एमबीएफ की स्थापना भारतीय इंजीनियरिंग की शिक्षा की जिज्ञासा, प्रयोग, अनुभावनात्मक शिक्षा और छात्रों के बीच नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
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उन्होंने बताया कि ऐसी कई लैब भारत में पहले भी स्थापित कर चुके हैं। आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रो. मनोज कुमार गौर ने बताया कि एमबीएफ और यूपीएल द्वारा संचालित यह टिंकर लैब संस्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उद्योग, शिक्षा और समाज के लिए प्रासंगिक समाधान बनाने के लिए बहुभाषिक व्यवस्था भी होगी।