पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जम्मू-कश्मीर की स्थिति में 52 प्रतिशत सुधार की रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर स्वैन ने कहा कि यह न केवल भौतिकी के बारे में है, बल्कि रसायन विज्ञान के बारे में भी है। उन्होंने कहा, आपने इसमें केवल भौतिकी को गिना है, आपको इसका विश्लेषण रसायन विज्ञान में करना चाहिए, जहां हमने 90 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। हमारे यहां पथराव में शून्य घटनाएं हैं। पथराव के दौरान कितने लोग मारे जाते थे या घायल होते थे। इसमें चाहे सुरक्षाबल हों या नागरिक, आपको इसकी गिनती करनी चाहिए।
डीजीपी स्वैन ने कहा, वह गणित है और आपको उसमें हमें 99 अंक देने होंगे। आप यह 52 प्रतिशत कहां से लेकर आए हैं। हमें और अंक चाहिए। इस सवाल पर कि क्या वे युवा जो पथराव करते थे, जनता दरबार में आते हैं और उन्होंने उनसे क्या कहा। इस पर स्वैन ने कहा कि ऐसा है जनता के जीवन की सुरक्षा के लिए कुछ लोगों पर लगाम कसने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, हमें यह जांचना होगा कि क्या वह (पत्थरबाज) अब कुछ अच्छा कर रहा है, ताकि यह कम हो सके। हम जानते हैं कि उसने गलत किया है। हम जांच करते हैं और हर चीज को रिकॉर्ड में रखते हैं। ऐसा नहीं है कि हम चेहरा देखें और फिर निर्णय लें। हम वस्तुनिष्ठ रूप से विवरण में जाते हैं। इसमें एक मैसेजिंग भी है। इस कमरे में हर कोई कहेगा कि हिंसा कम होनी चाहिए, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि यह कैसे कम होगी। वे तो यही कहते हैं कि ऐसा मत करो, वैसा मत करो, उसे या किसी और को जाने दो। कितनों को गिरफ्तार करना है, कितनों को छोड़ना है, अंततः मुझे केवल आपकी सुरक्षा की चिंता है। ऐसा करने के लिए कुछ लोगों पर लगाम कसने की जरूरत है। डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि पुलिस को एहसास है कि वह लोगों के समर्थन के बिना कुछ नहीं कर पाएगी और उन्होंने जनता से सहयोग मांगा।