ताज की लड़ाई में दोस्त दुश्मन बन जाते हैं और कल तक साथ रहने वाले बागी हो जाते हैं। कुर्सी की लड़ाई होती ही ऐसी है।
बगावत के सुर राजनीति के गलियारों से लेकर छात्रों के बीच पैठ बना चुके हैं। एक नजर राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनावों पर डालें तो बागियों को जीत रास आती है। मतलब यह कि अब तक जितने भी छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए हैं, उनमें संगठन से बगावत करने वालों की संख्या काफी है। फिर चाहे एबीवीपी हो या एनएसयूआई, बगावत करने वाले प्रत्याशी छात्रों की पसंद भी बनते हैं।
अब तक 34 छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं, जिनमें से करीब 17 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने संगठन से बगावत की थी। उन्होंने बिना संगठन के चुनाव लड़ा। दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव 1967 से हुई थी। पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आदर्श किशोर सक्सेना अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे।