वसुंधरा गुट के नेताओं ने बनाई दूरी
जयपुर में शनिवार को तीन बड़े आयोजन थे। जिसमें गहलोत सरकार का डिजीफेस्ट, सीए फाउंडेशन का कार्यक्रम था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी पहुंची थी। वहीं प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में राजीव गांधी का जन्मदिवस भी मनाया गया लेकिन इन कार्यक्रमों पर भाजपा के प्रदर्शन का कोई असर नहीं देखा गया बल्कि ये छोटे-मोटे कार्यक्रम के सामने भाजपा का प्रदर्शन फीका रह गया। वहीं वसुंधरा राजे गुट ने प्रदर्शन से दूरी बना ली।
नहीं जुटे कार्यकर्ता तो तीन बार बदला गया प्रदर्शन का समय
भाजपा का विरोध प्रदर्शन शहीद स्मारक से शुरू होकर सिविल लाइन गेट पर खत्म हुआ। हालांकि, पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ। पहले तो कार्यक्रम 10 बजे शुरू होने वाला था लेकिन कार्यकर्ता समय पर नहीं पहुंचे। कार्यकर्ताओं के नहीं आने की वजह से समय को बदल कर 11 बजे किया गया, फिर 11.30 और फिर 12 बजे प्रदर्शन शुरू हुआ। 500 कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा नेता मुख्यमंत्री आवास के घेराव करने के लिए बढ़े। मात्र 30 मिनट में गिरफ्तारी हुई और उसके बाद कार्यकर्ताओं का संख्या बल 200 ही रह गया। बहरहाल, भाजपा के प्रदर्शन ने ना आमजन पर कोई छाप छोड़ी और ना ही कांग्रेस का कोई भी कार्यक्रम प्रभावित हुआ।
बड़ा आंदोलन करने की थी तैयारी, नहीं जुटा सके संख्या बल
राजस्थान भाजपा के कार्यकर्ताओं की बेरुखी और पार्टी में अंदरुनी बिखराव को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया समेटने में कामयाब नहीं हो सके। 2021 में कोरोना काल के बाद भाजपा प्रदेश इकाई ने रीट को लेकर बड़ा आंदोलन करने का प्रयास किया। भाजपा राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुद्दा उठाया, आंदोलन का एलान भी हुआ। नेताओं ने विधानसभा घेराव करने की तैयारी की लेकिन कोई खास संख्या बल प्रदर्शन में जुट नहीं सकी।
इस आंदोलन करने से भाजपा का मकसद था कि वो रीट पेपर लीक को लेकर गहलोत सरकार को घेर ले। मामला बढ़ने पर गहलोत सरकार ने रीट की जांच एसओजी से करवाई और दोबारा परीक्षा तक करवा दी। विधानसभा में सीबीआई जांच के बजाय एसओजी से जांच करवाने पर खूब हंगामा हुआ लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा में भी भाजपा को ही घेर लिया था।
इसी प्रकार आरएएस भर्ती परीक्षा को लेकर भी बीजेपी बेहद आक्रमक दिखी पर जमीन पर कुछ खास नहीं हुआ। अलवर दुष्कर्म कांड पर भी भाजपा ने खूब हंगामा किया लेकिन गहलोत सरकार को घेर न सकी। प्रदर्शन इतना प्रभावहीन रहा कि दुष्कर्म कांड को लेकर घिरी अलवर एसपी तक को भाजपा नहीं हटवा सकी।
आपसी गुटबाजी जीत से न कर दे दूर
पिछले साल से लेकर इस साल तक भाजपा ने कई मुद्दों को भुनाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। पार्टी में अंतर्कलह, सीएम फेस के लिए आपसी गुटबाजी और कार्यकर्ताओं में एकजुटता की कमी ये कारण बनी है। भाजपा को सफलता का प्रचारित करने की जगह कारण पर काम करना चाहिए। जिससे 2023 में जिस प्रचंड जीत का दावा कर रही है, उसे आसानी से हासिल कर सके।