राजस्थान हाइकोर्ट ने हृदय रोग से पीड़ित एक बीपीएल महिला को मुख्यमंत्री सहायता कोष की राशि स्वीकृत नहीं किए जाने के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने डिस्चार्ज किए जाने के कारण राशि के भुगतान से वंचित करने के आदेश को गलत ठहराया। साथ ही, पीड़ित महिला को एक माह में स्वीकृत राशि के भुगतान के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष के सचिव को आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश पीड़ित महिला के पति गोविन्द नारायण गुप्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया की मार्च 2014 में याचिकाकर्ता की पत्नी विमला को हृदय रोग के कारण राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
जहां वह 20 मार्च से 24 मार्च तक भर्ती रही और आॅपरेशन करवाया। अस्पताल द्वारा इलाज के खर्च का करीब एक लाख पैंतीस हजार रुपए का अनुमानित खर्चा बताया। इस पर याचिकाकर्ता ने मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद के लिए आवेदन किया, किन्तु याचिकाकर्ता समय पर इसलिए आवेदन नहीं कर सका क्योंकि 21 और 22 मार्च को होली का अवकाश था।