राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि देवस्थान विभाग गर्भगृह, सभामंडप, गोखे किराये पर नहीं दे सकता है। यदि किसी को दे रखा है तो तुरंत उसकी किरायेदारी निरस्त करे।
न्यायाधीश केएस झवेरी की खंडपीठ ने यह आदेश मंदिर श्री गोवर्धन नाथजी की पीआईएल पर दिए। मंदिर में हो रहे अतिक्रमण के मामले में देवस्थान विभाग ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर कहा कि मंदिर परिसर में किसी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं है बल्कि मंदिर परिसर किराए पर दिया गया है।
देवस्थान विभाग के इस जवाब पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि 1974 व 2000 के सर्क्युलर के अनुसार देवस्थान विभाग परिसर किराये पर नहीं दे सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि विभाग ने इस तरह किसी को किराएदार बना रखा है तो किराएदारी तुरंत निरस्त करें। मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी।