जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर प्रथम ने एक मामले में कोविड जांच शुल्क के साथ प्रोटेक्शन चार्ज वसूली को अनफेयर प्रैक्टिस करार दिया है। आयोग ने ओके डायग्नॉस्टिक टोंक रोड पर 9 प्रतिशत ब्याज सहित 10 हजार का हर्जाना लगाया है। डायग्नॉस्टिक को पैसे वापसी के आदेश जारी किए हैं।
इस प्रोटेक्शन शुल्क वसूली के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में चुनौती देते हुए कहा कि इस दौरान उनके हाथ को सैनिटाइज करवाने और एक पतली थैली को टेस्ट के दौरान काम में लिया गया था। जबकि कोरोना गाइडलाइन के अनुसार सभी सुरक्षा व्यवस्था निशुल्क रखनी थी। इसलिए डायग्नॉस्टिक सेंटर की ओर से प्रोटेक्शन शुल्क के नाम पर वसूली एक अफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है।
गोयल ने बताया कि इसी राजस्थान महामारी अध्यादेश 2020 कि धारा 4 का उपयोग करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव अखिल अरोरा ने कोविड के अंदर कराये जाने वाले विभिन्न प्रकार कि जांचों की कीमत निर्धारित की, जो पहले से ही आसमान छू रही थी। इसको लेकर आदेश भी जारी हुए थे कि तय कीमत से ज्यादा वसूली करने पर करवाई कि जाएगी। जिसमें धारा 5 के तहत करवाई जिसमें 20 हजार का जुर्माना और 2 साल की कैद का भी प्रावधान या दोनों की व्यवस्था है।
एडवोकेट गोयल का कहना है कि जब माननीय आयोग ने परिवादी से अधिक राशि वसूली पर अपना निर्णय दिया है तो सरकार सेंटर और इसे अस्पतालों के खिलाफ जांच और करवाई करे। जिन्होंने लाखों लोगों के साथ जांच के नाम पर ज्यादा वसूली कर नियमों का मजाक बनाया है।