राजस्थान हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को कहा है कि वह अपीलीय अधिकारी के तौर पर नगरीय विकास कर निर्धारण से संबंधित प्रकरणों की अपीलों पर सुनवाई ना करे।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश रुक्मणी बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता अर्चित बोहरा ने अदालत को बताया कि नगर निगम की ओर से नगरीय विकास कर निर्धारण के खिलाफ राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 के तहत जिला कलक्टर या निगम की एम्पावर्ड कमेटी को अपील सुनने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने गत वर्ष आदेश जारी कर तय किया कि निगम के आदेश की अपील निगम आयुक्त नहीं सुन सकता। ऐसे में यूडी टैक्स निर्धारण की अपील सिर्फ जिला कलक्टर ही सुन सकता है।
याचिका में कहा गया कि गत दिनों अधिनियम में संशोधन कर अपील सुनने का अधिकार वापस निगम आयुक्त को दे दिया गया। जिसके चलते याचिकाकर्ताओं की अपीलों को निगम आयुक्त को भेज दिया गया। जिसे चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया कि आयुक्त निगम का अधिकारी होने के कारा निगम के खिलाफ ही अपीलों पर निष्पक्ष सुनवाई नहीं कर सकता। इसके साथ ही हाईकोर्ट पहले ही तय कर चुका है कि कलक्टर ही अपील सुन सकता है।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने निगम आयुक्त को अपीलीय अधिकारी के तौर पर यूडी टैक्स निर्धारण की अपीलों पर सुनवाई न करने के लिए पाबंद कर दिया है।