राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायाधीश केएस झवेरी ने कहा कि पैरा लीगल वॉलेन्टियर्स गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक पहुंचकर वंचितों को न्याय दिलाने में कर्मयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि यदि वे इसमें तकनीक को शामिल करें तो नतीजे और भी अच्छे हो सकते हैं।
न्यायाधीश झवेरी आज दो दिवसीय पैरा लीगल वॉलेन्टियर्स की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का काम उपेक्षित वर्ग को न्याय दिलाना है और इसमें पैरा लीगल वॉलेन्टियर्स अपनी महत्ती भूमिका निभा सकते हैं। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्राधिकरण के सदस्य सचिव एसके जैन ने पैरा लीगल वॉलेन्टियर्स के कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सूचना और आर्थिक कारणों से कोई भी न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए।
पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश ताराचंद सोनी ने सुझाव दिया कि वर्तमान में चौपाल न्यायालयों की जरूरत है, ताकि छोटे-छोटे मामले चौपाल न्यायालयों में ही निस्तारित हो जाए। उन्होंने कहा कि अदालत में गवाह झूठी गवाही दे सकता है, लेकिन चौपाल में सभी लोगों के सामने वह झूठ बोलने से बचेगा। वहीं पूर्व न्यायाधीश जीएस होरा ने कहा कि आईएएस अधिकारी यदि अपने कक्ष को छोडकर अपने दफ्तर का राउंड लगाएं तो इससे काम की गति अपने आप बढ़ जाएगी। कार्यशाला में राजस्थान हाईकोर्ट के कई न्यायाधीशों सहित विभिन्न जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के पूर्णकालिक सचिव भी मौजद रहे।