वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार, विश्व में 1.86 करोड़ लोग हर वर्ष हृदय संबंधी तकलीफों से जान गंवाते हैं। यही नहीं हृदय रोग से ग्रसित 52 करोड़ लोगों के लिए कोरोना महामारी खतरनाक चुनौती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पांच में से एक मौत का कारण कार्डियो वैस्कुलर डिजीज (सीवीडी) या स्ट्रोक है। इसमें से एक तिहाई मौतें असामयिक होती हैं। अधिकतर मृतकों की उम्र 70 वर्ष से कम होती हैं।
हार्ट अटैक आने पर क्या करें?
हार्ट अटैक के लक्षणों को ऐसे पहचानें
वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार, विश्व में 1.86 करोड़ लोग हर वर्ष हृदय संबंधी तकलीफों से जान गंवाते हैं। यही नहीं हृदय रोग से ग्रसित 52 करोड़ लोगों के लिए कोरोना महामारी खतरनाक चुनौती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पांच में से एक मौत का कारण कार्डियो वैस्कुलर डिजीज (सीवीडी) या स्ट्रोक है। इसमें से एक तिहाई मौतें असामयिक होती हैं। अधिकतर मृतकों की उम्र 70 वर्ष से कम होती हैं।
हार्ट अटैक आने पर क्या करें?
हार्ट अटैक के लक्षणों को ऐसे पहचानें
वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. धर्मेंद्र जैन बताते हैं कि मोबाइल फोन एप्लीकेशन, स्मार्ट वॉच, फिटबिट समेत अन्य डिजिटल माध्यमों से दिल की सेहत का ध्यान रखा जा सकता है। हृदय संबंधी रोग के लक्षण दिखने पर नेशनल टेली कंसल्टेशन सर्विस ई-संजीवनी ओपीडी (https://esanjeevaniopd.in/) पर ऑनलाइन मदद ले सकते हैं।
ऑक्सीजन की कमी से हृदय को क्षति
लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भुवन चंद्र तिवारी बताते हैं, कोरोना के जिन मरीजों में निमोनिया हो जाता है, उनमें हृदय का काम बढ़ जाता है। इससे ऑक्सीजन की मांग बढ़ती है जिससे हृदय को क्षति पहुंचती है।
मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल के डॉ. नंदकिशोर कपाड़िया बताते हैं, कोरोना से हृदय की मांसपेशी में सूजन संभव है। वायरस हृदय को क्षति पहुंचा ऑक्सीजन संतुलन को बिगाड़ सकता है।
सीने में दर्द को गैस न समझें
डॉ. कपाड़िया बताते हैं, वायरस फेफड़े से दिल और किडनी तक को प्रभावित कर रहा है। महामारी के दौर में किसी को सीने में दर्द महसूस हो तो उसे गैस समझकर नजरअंदाज न करें।
युवाओं को बरतनी होगी सावधानी
प्रो. धर्मेंद्र जैन बताते हैं, हृदय रोग अब सिर्फ अधिक उम्र वालों की बीमारी नहीं है। हाल के दिनों पर नजर डालेंगे तो हार्ट अटैक से युवाओं की जान गई है। युवाओं में शराब, बीयर, सिगरेट, मांसाहार भोजन की लत हृदय को बीमार बनाने के कारक है।
वायरस से दिल को नुकसान क्यों?
कोरोना के पांच फीसदी गंभीर मरीजों में साइटोकाईन स्टॉर्म दिखा है। इसमें मरीज का इम्युन सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है। ये रक्त प्रवाह में इन्फलेमेट्री मॉलीक्यूल्स छोड़ता है जिसे साइटोकाइन्स कहते हैं। साइटोकाइन्स की अत्यधिक सक्रियता के कारण हृदय के साथ शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचता है।
इलेक्ट्रिक शॉक नहीं तो ब्रेन डेड
डॉ. तिवारी बताते हैं, हार्ट अटैक से मौत का प्रमुख कारण इलेक्ट्रिकल रिदम में अवरोध होता है जिसे वेंट्रिकुलर फिबरिलेशन कहते हैं। अवरोध दूर करने के लिए रोगी को सीने पर इलेक्ट्रिक शॉक देना होता है जिसे डिफिबरिलेशन कहते हैं। डिफिबरिलेशन नहीं है तो रोगी की 10 मिनट से भी कम समय में ब्रेन डेथ हो सकती है। लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज न करें।
युवाओं को हृदय रोग का खतरा नहीं ये अधिक उम्र वालों की बीमारी?
सच : हृदय रोग का उम्र से संबंध नहीं है। नवजात से लेकर किशोर और बुजुर्ग चपेट में आ सकते हैंै। मोटापा और डायबिटीज मेलाइटस युवाओं में हृदय रोग का प्रमुख कारण है।
मैं युवा हूं जंक फूड खा सकता हूं, व्यायाम की जरूरत नहीं है।
सच : युवाओं की खराब जीवनशैली और दूषित खानपान उनके हृदय को भविष्य में नुकसान पहुंचाने का कारक है। शराब, सिगरेट, तंबाकू उत्पादों के सेवन से युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं।
डायबिटीज है लेकिन नियंत्रित है, इसलिए हृदय को क्षति नहीं?
सच : मधुमेह की नियमित दवा ले रहे लोगों में हृदय संबंधी तकलीफें कम हो सकती हैं। हाई बीपी, मोटापा, मधुमेह और शारीरिक क्रिया बंद होने से रोग का खतरा दोगुना।
हाई कोलेस्ट्रॉल युवावस्था में नहीं, अधिक उम्र वालों की तकलीफ
सच : कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच 20 वर्ष के बाद हर पांच वर्ष पर करानी चाहिए। कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी तकलीफ परिवार में है तो समय से पहले भी जांच करा सकते हैं।
हृदय रोग पीढ़ियों से चला आ रहा, मैं कुछ नहीं कर सकता हूं?सच : परिवार में हृदय रोग है तो आने वाली पीढ़ी को रोग का खतरा रहता है। हां ये जरूर है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है। कार्डियो वैस्कुलर डिजीज पर सावधानी और इलाज से नियंत्रण संभव है।