फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

विश्व पर्यावरण दिवस 2019 : भारत की अपील, वायु प्रदूषण से जंग में 'हवा आने दो' न...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Tue, 04 Jun 2019 03:26 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo

दुनियाभर में हर साल विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। आज ही के दिन हर साल पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लिया जाता है। इनमें प्रकृति के प्रति चिंता और उसके सरंक्षण की भावना निहित है। विश्व में लगातार बढ़ते प्रदूषण और बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की चिंताओं के चलते विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत की गई थी। 



भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1974 की गोष्ठी में 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में यह भारत का पहला कदम था। तभी से हम हर साल 5 जून का यह दिन पर्यावरण को समर्पित करते आ रहे हैं।

 

इस साल वायु प्रदूषण है थीम 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय यूएनईपी द्वारा घोषित विशेष थीम पर फोकस करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस मनाता है। इस दिवस की सबसे खास बात ये है कि इसमें हर साल एक नई थीम होती है। इस साल की थीम है 'वायु प्रदूषण'।

पहला पर्यावरण सम्मेलन 

पर्यावरण की समस्या पर पहला सम्मेलन साल 1972 में स्टॉकहोम की राजधानी स्वीडन में आयोजित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 119 देशों ने भाग लिया था। 



इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की स्थापना की गई थी। और हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने का फैसला लिया गया। ताकि नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था।

 

'हवा आने दो'

इस खास मौके पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मुंबई के भामला फाउंडेशन की सहायता से 'हवा आने दो' गीत तैयार किया है। जो इस साल की थीम पर आधारित है। मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली व्यक्तियों से युक्त इस गीत का उद्देश्य वायु प्रदूषण से जुड़े संदेश का प्रचार-प्रसार करना है।


 

पर्यावरण से संबंधित अधिनियम 19 नवंबर 1986 में लागू हुआ था। इसमें जल, भूमि और वायु तीनों से संबंधित कारक जैसे मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।


 

इस दिन पूरी दुनिया में सबसे अधिक पौधारोपण होता है। इसके पीछे का एक कारण ये भी है कि बाकी दिन लोग अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं लेकिन इस दिन विभिन्न संस्थानों, स्कूलों आदि जिनमें पर्यावरण से संबंधित संस्थान मुख्य भूमिका निभाते हैं, इनके द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं और पौधे लगाने में अपना योगदान देते हैं।

विज्ञापन

 

आज के समय में जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, तापीय प्रदूषण, विकरणीय प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, समुद्रीय प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण, नगरीय प्रदूषण, प्रदूषित नदियां,  जलवायु बदलाव, और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसी हालत में हमें इतिहास की चेतावनी ही पर्यावरण दिवस का संदेश देती है।


 

यही एक ऐसा दिन है जिसमें लोग पर्यावरण के बारे में सोचते हैं। यही दिन हमें उज्जवल भविष्य के लिए एक नए सवेरे की आशा देता है। तो प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम करें और अधिक से अधिक पौधे लगाएं ताकि इस बार की ये थीम सार्थक बन सके। यदि आप आज पेड़ लगाएंगे तभी कल सांस ले पाएंगे। यही है इस खास दिन का उद्देश्य। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next