केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, होली के बाद एम्स के 16वें निदेशक का नाम सार्वजनिक हो सकता है। सोमवार को इसे लेकर बैठक प्रस्तावित है, जिसमें अंतिम नामों को लेकर निर्णय होगा।
देश के सबसे बड़े अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बीते 32 साल से कोई भी महिला निदेशक नहीं बनी है। इस बार नए निदेशक की दौड़ में कई चेहरे शामिल हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। एक चर्चा यह भी है कि इस बार एम्स की कमान महिला डॉक्टर को सौंपी जा सकती है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, होली के बाद एम्स के 16वें निदेशक का नाम सार्वजनिक हो सकता है। सोमवार को इसे लेकर बैठक प्रस्तावित है, जिसमें अंतिम नामों को लेकर निर्णय होगा। हालांकि, अंतिम फैसला मंत्री मंडल की समिति लेती है।
एम्स को महिला निदेशक देकर सरकार एक बड़ा संदेश भी दे सकती है। 32 लोगों की सूची में महिला उम्मीदवार के तौर पर एम्स के न्यूरो विभागाध्यक्ष डॉ. एम पद्मा का नाम भी शामिल है। इनके अलावा एम्स से ही डॉ. राजेश मल्होत्रा, डॉ. शिव चौधरी, डॉ. एके बिसोई, डॉ. सुधीर गुप्ता, डॉ. निखिल टंडन के नाम पर भी चर्चा चल रही है।
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एम्स के वर्तमान निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कार्यकाल 23 मार्च को पूरा हो रहा है। सरकार ने 25 नवंबर 2021 को निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए आवेदन मांगे थे। इसके तहत 32 डॉक्टरों ने आवेदन किया है, जिसमें एम्स के 14 डॉक्टर शामिल हैं।
केवल एक बार हुई नियुक्ति साल 1956 में फॉर्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बीबी दीक्षित नई दिल्ली एम्स के पहले निदेशक नियुक्त हुए थे। तब से अब तक 15 बार निदेशक पद पर नियुक्ति हो चुकी है। वर्ष 1956 से अब तक सिर्फ एक बार ही एम्स की निदेशक महिला रही हैं। साल 1984 से 1990 के बीच रेडियोलॉजी विभाग की डॉ. स्नेहा भार्गव निदेशक रहीं, जो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव की माता हैं। डॉ. बलराम भार्गव का नाम भी नए निदेशक के तौर पर प्रमुखता से देखा जा रहा है।