उन्होंने आगे बताया कि दीपावली के त्योहार के बाद से ही वह आंदोलन के लिए निकले हैं। अब तक घर नहीं आए हैं। वह लगातार बाहर हैं तो मैं और पूरा परिवार उन्हें याद करता है। वीडियो कॉल के जरिये भी उनसे बात होती है। जब ज्यादा दिन हो जाते हैं तो हम परिवार सहित ही उनसे धरने स्थल पर कुछ देर मिलने के चले जाते हैं, लेकिन उस दौरान भी ज्यादा बात नहीं हो पाती है। आज हम उन्हें घर परिवार की कोई भी चिंता नहीं दे चाहते हैं क्योंकि उन्हें पहले ही लाखों किसान परिवारों की चिंता है।
राकेश टिकैत के भावुक होने और आंदोलन के कमजोर पड़ने के सवाल पर उनकी पत्नी ने कहा, वह ऐसे ही नहीं भावुक हुए। वह लाखों किसानों के हक के लिए भावुक हुए। इन किसानों को क्या अगर उस दिन उन्हें पुलिस गिरफ्तार कर लेती। गिरफ्तार होना, मुकदमा होना और जेल में जाना इससे हम लोग नहीं डरते। यह तो हमारा चोला है। आज राकेश जी करीब 32 बार धरने आंदोलन के चलते जेल जा चुके हैं।
आज जो लोग आंदोलन छोड़कर जा रहे हैं या आंदोलन को कमजोर कर रहे हैं, इससे हम किसानों को कोई फर्क नहीं पड़ता। जो आंदोलन में टिकने वाले थे वह टिक गए और जो जाने वाले थे वह चले गए। मिठाई, रसगुल्ले और गाजर हलवा खाया तो टिके रहे, लेकिन जब करेला खाने का टाइम आया तो वह लोग भाग गए। 26 जनवरी को लाल किले पर जो हुआ वह सरकार की सोची समझी साजिश के तहत हुआ है।
वहीं दूसरी तरफ नौ महीने गर्भवती मोनिका राज अपने दर्द और परेशानी को भूलकर अपने पति राहुल राज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं। उन्हें नहीं पता कि उन्हें कब लेबर पेन उठ जाए और कब अस्पताल जाना पड़े, लेकिन वह किसान आंदोलन और अपने पति को सफल बनाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। हालांकि, उनका कहना है कि उनका ध्यान रखने के लिए पूरा परिवार उनके साथ है।
अमर उजाला से चर्चा में मध्यप्रदेश से युवा किसान नेता राहुल राज की पत्नी ने कहा, राहुल मध्यप्रदेश से किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं तो घर की सभी चीजें मैं और पूरा परिवार अपने स्तर पर संभाल रहे हैं ताकि इनको कोई परेशानी न हो। जब राहुल बाहर होते हैं तो हमारी कोशिश होती है कि दिनभर में हम एक बार एक दूसरे से फोन पर बात कर सकें।
75 वर्षीय किसान नेता हन्नान मौला की 68 वर्षीय पत्नी मोना मौला अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की दिल्ली क्षेत्र की अध्यक्ष भी हैं। वह लगातार महिलाओं के मुद्दों को लेकर आवाज उठाती हैं। अमर उजाला से चर्चा में उन्होंने कहा, कॉमरेड हन्नान मौला लगातार संघर्ष करते रहे हैं। कॉमरेड एक तरह से डेली पैसेंजर की तरह काम करते हैं। एक दिन भारत के किसी कोने में होते हैं तो दूसरे दिन किसी अन्य कोने में होते हैं। तीसरे दिन कहीं ओर होते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर हम दोनों एक दूसरे का सहयोग करते हैं और ख्याल रखते हैं। साथ ही अपने-अपने कार्यों को संभालते हैं।