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आखिर क्यों चुना गया मिराज 2000, जिसने पीओके में आतंकी ठिकानों को किया बर्बाद

Tue, 26 Feb 2019 01:31 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मिराज विमान
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भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के पाक अधिकृत कश्मीर में जैश के ठिकानों पर जमकर बमबारी की। इस दौरान कई आतंकी कैंप के नष्ट होने की खबर है। भारतीय वायुसेना के 12 मिराज-2000 विमानों के समूह ने जैश के कैंप पर 1000 किलोग्राम के बम गिराए। इस हमले के लिए एयरफोर्स द्वारा मिराज-2000 विमानों का चयन करना भी एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। जानिए मिराज-2000 विमानों की खासियत-
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भारतीय वायुसेना की रीढ़ समझे जाने वाले मिराज- 2000 लड़ाकू विमान डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक करने की क्षमता रखते हैं। इसका मतलब यह लड़ाकू विमान अंदर तक घुसकर मार करने में सक्षम है। यह प्लेन किसी भी देश में भीतर तक जाकर बिना राडार की पकड़ में आए टारगेट को ध्वस्त कर सकता है। कुछ ही दिन पहले पोखरण में हुए वायुशक्ति 2019 में मिराज ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया था।

मिराज-2000 विमान फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया है। यह वही कंपनी है जिसने राफेल को बनाया है जिसे लेकर भारतीय राजनीति आज भी गर्माई हुई है। मिराज-2000 चौथी जेनरेशन का मल्टीरोल, सिंगल इंजन लड़ाकू विमान है। इसकी पहली उड़ान साल 1970 में आयोजित की गई थी। यह फाइटर प्लेन अभी लगभग नौ देशो में अपनी सेवाएं दे रहा है। 
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हथियार
मिराज 2000 में हथियारों को ले जाने के लिए नौ हार्डपॉइंट दिए गए हैं। जिसमें पांच प्लेन के नीचे और दो दोनों तरफ के पंखों पर दिया गया है। सिंगल-सीट संस्करण भी दो आंतरिक हैवी फायरिंग करने वाली 30 मिमी बंदूखों से लैस है। हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों में MICA मल्टीगेट एयर-टू-एयर इंटरसेप्ट और कॉम्बैट मिसाइलें शामिल है। इसके अलावा भी यह कई प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है। 
 
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इसलिए भारत ने खरीदा था 'मिराज 2000'

मिराज विमान
पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा उस समय के सबसे बेहतरीन विमान एफ-16 को दिए जाने के बाद भारत ने फ्रांस के मिराज 2000 की खरीद के संबंध में बातचीत शुरू कर दी थी। अक्टूबर 1982 में भारत ने 36 सिंगल-सीट मिराज-2000Hs और 4 ट्विन-सीट मिराज-2000THs के लिए डसॉल्ट को ऑर्डर दिया।

पहले, 150 विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ बातचीत चल रही थी, जिसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ संयुक्त उत्पादन के तहत होता।  भारत के पास लाइसेंस के तहत कई मिराज 2000 का उत्पादन करने का विकल्प था जो बाद में सोवियत संघ के साथ देश के घनिष्ठ संबंध के कारण खत्म हो गया था।

29 जून 1985 को नंबर 7 स्क्वाड्रन के पहले सात विमानों की डिलीवरी के साथ भारतीय वायु सेना इस प्रकार का पहला विदेशी सेना बनी जिसके पास मिराज 2000 विमान थे। शुरूआत में इस विमान में स्नेक्मा एम 53-5 इंजन थे जिसे बाद में एम 53 पी-2 इंजन से बदल दिया गया।

मिराज 2000 में परिवर्तित होने वाला दूसरा स्क्वाड्रन नंबर 1 स्क्वाड्रन था। जिसे द टाइगर्स के नाम से जाना जाता है। इसे 1986 में औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया
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