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West Bengal Election 2021 : बंगाल की बेटी ने स्वीकारी चुनौती, अब भाजपा की बारी- सुब्रत मुखर्जी

Thu, 04 Mar 2021 11:17 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 60-70 सीट जीतने के लिए लड़ रही है भाजपा
  • भाजपा के पास चेहरा होता तो मान लेते कि 100 पार जाएगी
  • कूच बिहार, नार्थ बंगाल, हुगली में जीत सकेगी कुछ सीटें
  • मिदनापुर, बर्दवान, आसनसोल में कुछ कर सकती है भाजपा
  • ये आया, वो आएगा, उसको तोड़ लो बंगाल में नहीं चलता
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सुब्रत मुखर्जी - फोटो : Facebook : @Subrata Mukherjee
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विस्तार
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सुब्रत मुखर्जी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता सरकार में पंचायतीराज मंत्री हैं। अमर उजाला से विशेष चर्चा में वह कहते हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, टीएमसी की नेता ममता बनर्जी ने भाजपा की चुनौती स्वीकार ली है। वह 11 मार्च को नंदीग्राम से पर्चा भरेंगी। मुखर्जी कहते हैं कि अब बारी भाजपा की है। वह मैदान में आए तो सही। 

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टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुब्रत मुखर्जी का कहना है कि बंगाल में झूठी खबरों और गलत तथ्यों की राजनीति नहीं चल सकती। बंगाल की राजनीति में ये शामिल हो गया, वो आएगा, उसको तोड़ लो यहां सह सब नहीं चलता। राजनीति करनी है तो बंगाल में चेहरा चाहिए, वह भाजपा के पास नहीं है।

तीसरी बार सरकार का दावा कर रहे मंत्री

टीएमसी सांसद सौगत राय, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन, ममता सरकार में मंत्री साधन पांडे भी अमर उजाला से चर्चा के दौरान राज्य में तीसरी बार ममता बनर्जी के नेतृत्व में सरकार का दावा कर रहे हैं। ममता सरकार के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी कहते हैं कि कांग्रेस और वामदलों को भी कुछ सीटें मिलेंगी। ये सीटें थोड़ी-बहुत मात्रा में सरकार विरोधी वोटों के बंटने से मिलेंगी। राज्य सरकार के मंत्री कहते हैं कि तृणमूल के विरोध में जाने वाला वोट भाजपा में बंटेगा। हम यही कह सकते हैं कि भाजपा इसका सबसे अधिक बंटवारा करके मुख्य विपक्षी दल हो सकती है।
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देखिए सुवेंदु अधिकारी कहां से चुनाव लड़ेंगे?

टीएमसी के नेताओं को भरोसा है कि सुवेंदु अधिकारी को हारने के लिए भाजपा नंदीग्राम से मैदान में नहीं उतारेगी। सुब्रत मुखर्जी का भी कहना है कि अधिकारी ने भले कह दिया है, लेकिन वह मन से नंदीग्राम से नहीं लड़ना चाहेंगे। वह ममता बनर्जी के सामने चुनाव लड़ने का मतलब समझते हैं। देखना यह भी होगा कि वह जनता के समर्थन से विधायक बन भी पाते हैं या नहीं? अभी तक टीएमसी छोड़कर उनसे बड़ा कोई नेता भाजपा में शामिल नहीं हो सका। जितेन्द्र तिवारी समेत अन्य के टीएमसी छोड़कर जाने से भाजपा की सरकार नहीं बनने वाली है।

भाजपा अभी भी ममता के खिलाफ चेहरा ढूंढ रही

सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि भाजपा ने क्रिकेटर सौरव गांगुली पार्टी में लाने की भरसक कोशिश की, लेकिन गांगुली ने राजनीति में आने से मना कर दिया। भाजपा अभी भी चेहरा ढूंढ रही है। अब तो चुनाव शुरू हो गया है। मुखर्जी कहते हैं कि कदाचित कोई चेहरा खड़ा भी कर ले तो भाजपा को इसका अब लाभ नहीं मिल पाएगा। हालांकि सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि भाजपा की पिछले चुनाव से कई गुना सीटें बढ़ेंगी। वह 60-70 सीटों तक पा सकती है। उसे नार्थ बंगाल, कूच बिहार हुबली, मिदनापुर, बर्दवान में कुछ सीटें मिल सकती है।
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प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री तो नहीं बनेंगे?

टीएमसी नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में चाहे कितनी भी बार आएं और कितनी भी जनसभाएं करके प्रचार कर लें, लेकिन वह राज्य के मुख्यमंत्री तो बनेंगे नहीं? इसलिए इनके आने से भाजपा का वोट बढ़ सकता है, लेकिन सीटों और चुनाव पर कोई खास अंतर नहीं पड़ने वाला है। 

सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि आप नोट करके रख लीजिए। दो मई के बाद बात करेंगे। भाजपा 100 सीटों के भीतर सिमट जाएगी। जो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं, उन्होंने भी कोई छात्र राजनीति नहीं की है। यहां पहले कोई बड़ा आंदोलन नहीं चलाया, राजनीति नहीं की। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता रहे और अब पार्टी के अध्यक्ष हो गए हैं। बंगाल में उनका अपना कोई चेहरा नहीं है। इसलिए भाजपा के पास दावे के सिवा कुछ नहीं है।
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