टीएमसी के नेताओं को भरोसा है कि सुवेंदु अधिकारी को हारने के लिए भाजपा नंदीग्राम से मैदान में नहीं उतारेगी। सुब्रत मुखर्जी का भी कहना है कि अधिकारी ने भले कह दिया है, लेकिन वह मन से नंदीग्राम से नहीं लड़ना चाहेंगे। वह ममता बनर्जी के सामने चुनाव लड़ने का मतलब समझते हैं। देखना यह भी होगा कि वह जनता के समर्थन से विधायक बन भी पाते हैं या नहीं? अभी तक टीएमसी छोड़कर उनसे बड़ा कोई नेता भाजपा में शामिल नहीं हो सका। जितेन्द्र तिवारी समेत अन्य के टीएमसी छोड़कर जाने से भाजपा की सरकार नहीं बनने वाली है।
सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि भाजपा ने क्रिकेटर सौरव गांगुली पार्टी में लाने की भरसक कोशिश की, लेकिन गांगुली ने राजनीति में आने से मना कर दिया। भाजपा अभी भी चेहरा ढूंढ रही है। अब तो चुनाव शुरू हो गया है। मुखर्जी कहते हैं कि कदाचित कोई चेहरा खड़ा भी कर ले तो भाजपा को इसका अब लाभ नहीं मिल पाएगा। हालांकि सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि भाजपा की पिछले चुनाव से कई गुना सीटें बढ़ेंगी। वह 60-70 सीटों तक पा सकती है। उसे नार्थ बंगाल, कूच बिहार हुबली, मिदनापुर, बर्दवान में कुछ सीटें मिल सकती है।
टीएमसी नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में चाहे कितनी भी बार आएं और कितनी भी जनसभाएं करके प्रचार कर लें, लेकिन वह राज्य के मुख्यमंत्री तो बनेंगे नहीं? इसलिए इनके आने से भाजपा का वोट बढ़ सकता है, लेकिन सीटों और चुनाव पर कोई खास अंतर नहीं पड़ने वाला है।
सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि आप नोट करके रख लीजिए। दो मई के बाद बात करेंगे। भाजपा 100 सीटों के भीतर सिमट जाएगी। जो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं, उन्होंने भी कोई छात्र राजनीति नहीं की है। यहां पहले कोई बड़ा आंदोलन नहीं चलाया, राजनीति नहीं की। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता रहे और अब पार्टी के अध्यक्ष हो गए हैं। बंगाल में उनका अपना कोई चेहरा नहीं है। इसलिए भाजपा के पास दावे के सिवा कुछ नहीं है।