फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसून की दस्तक के बावजूद सूखे की चपेट में देश का 40 फीसदी हिस्सा, पीने के पानी का संकट भी गहराया

Mon, 10 Jun 2019 01:28 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
जल संकट - फोटो : Social Media
विज्ञापन
लगातार बदल रहे मौसम के कारण दुनिया के कई हिस्से भीषण जलसंकट से गुजर रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश का बड़ा भाग पीने और सिचाईं के लिए पानी की कमी का सामना कर रहा है। देश में सूखे का आंकड़ा हर साल बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान में देश का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सूखे की चपेट में है।
विज्ञापन


सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली और मुंबई में भी पानी का संकट गंभीर बना हुआ है। शहरों में पीने के पानी की कमी ने संकट को और बढ़ा दिया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 400 करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है जिसमें 25 फीसदी भारतीय भी शामिल हैं। वाटर एड संस्था की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के कुल जमीनी पानी का 24 फीसदी भारतीय उपयोग करते हैं। देश में 1170 मिमी औसत बारिश होती है, लेकिन हम इसका सिर्फ 6 फीसदी पानी ही सुरक्षित रख पाते हैं।
विज्ञापन


एक रिपोर्ट में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि भूजल का दोहन नहीं रूका तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। 75 फीसदी घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड द्वारा तय मात्रा की तुलना में भूमिगत पानी का 70 फीसदी ज्यादा उपयोग हो रहा है।

2050 तक भारत और चीन पेयजल की भयानक संकट का करेंगे सामना

जल संकट - फोटो : PTI
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक भारत और चीन पेयजल की भयानक संकट का सामना करेंगे। तब समुद्र का यह खारा पानी लोगों के लिए वरदान साबित होगा। इसके तहत जल शोधन का ऐसा तरीका तैयार किया गया है, जिससे आर्सेनिक और यूरेनियम युक्त पानी को भी पीने लायक बनाया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक दुनिया के लगभग 4 अरब लोग पेयजल में तब्दील होने वाले इस समुद्री पानी का प्रयोग करने लगेंगे।

वर्तमान समय में देश के 29 फीसदी विकास खण्ड या तो भूगर्भ जल के दयनीय स्तर पर हैं या चिंतनीय हैं और कुछ आंकड़ों के अनुसार 2030 तक लगभग 60 फीसदी ब्लाक चिंतनीय स्थिति में आ जायेंगे। भारत में 40 करोड़ लोग तटीय क्षेत्रों में रहते हैं। समुद्र के किनारे रहने के कारण इन्हें पीने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है। 
विज्ञापन

दिल्ली में भूजल का अधिकांश हिस्सा पीने लायक नहीं

जल संकट - फोटो : सोशल मीडिया
एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली एनसीआर का 75 फीसदी भूगर्भ जल पीने लायक नहीं है। प्रदूषण के कारण पूरे दिल्ली एनसीआर के भूगर्भ जल में जहरीले रसायन मिले पाए गए हैं। दक्षिण पश्चिमी व उत्तर पश्चिमी दिल्ली के भूजल में लवणता की मात्रा बढ़ रही है।

केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि देश के 91 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले 10 साल के औसत से कम हो गया है। इनमें से अधिकतर जलाशय दक्षिण और पश्चिम भारत में हैं। जलाशयों में लगातार पानी के घटने से देश में जल संकट और गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें