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सावधान: बच्चों में अब डेल्टा संग आरएस वायरस का भी खतरा

Sat, 07 Aug 2021 06:17 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला रिसर्च टीम

सार

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने बताया है कि जून से ही आरएसवी के मामले आने लगेंगे, लेकिन डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते प्रकोप के बीच इसमें तेजी देखी गई है।
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बच्चों में कोरोना(सांकेतिक) - फोटो : i stock
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विस्तार
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महामारी की तीसरी लहर में आशंका है कि बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। डेल्टा से जूझ रहे अमेरिका में दो सप्ताह से 17 वर्ष के बच्चों में रेसपाइरेटरी सिनसिशल वायरस (आरएसवी) के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिसको लेकर अमेरिका चिंतित है।

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अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने बताया है कि जून से ही आरएसवी के मामले आने लगेंगे, लेकिन डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते प्रकोप के बीच इसमें तेजी देखी गई है। चिंताजनक ये है कि इस वायरस के मामले सर्दी में अधिक मिलते हैं, लेकिन डेल्टा के प्रकोप के बीच गर्मी के मौसम मे इसमें बढ़ोतरी से विशेषज्ञ हैरान हैं।



कोरोना जैसे ही फैलता है
मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल की पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट की विशेषज्ञ डॉ. प्रीथा जोशी बताती हैं कि आरएसवी भी कोरोना की तरह खांसने-छींकने से फैलता है, आंख, नाक और मुंह से वायरस शरीर में प्रवेश करता है, दरवाजों के हैंडल इत्यादि से भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं। आरएसवी संक्रमित बच्चे के चेहरे को चूमने से भी संक्रमण संभव है।
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एक से दो सप्ताह ठीक होने में लगता है
लखनऊ के लोहिया संस्थान की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका पांडे बताती हैं कि ये सामान्य वायरस है। दो साल तक के बच्चे इसकी चपेट में अधिक आते हैं। आरएसवी की चपेट में आने के बाद बच्चों में सर्दी और खांसी की तकलीफ होती है। अधिकतर बच्चे बिना दवा एक से दो सप्ताह में ठीक हो जाते है, कुछ बच्चों को भर्ती भी करना पड़ता है।

कोरोना के दौर में लापरवाही नहीं
डॉ. प्रियंका बताती हैं कि कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों में होने वाली किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ को नजरअंदाज नहीं करना है। बच्चों में सांस की तकलीफ हो तो डॉक्टर से मिलें।

आरएसवी से फेफड़ों की छोटी ट्यूब में सूजन
केजीएमयू, लखनऊ के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर यूनिट के हेड डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि तीन में से एक बच्चे को आरएसवी के कारण फेफड़ों की सबसे छोटी ट्यूब ब्रॉंक्यिोल्स में सूजन हो सकती है। इससे उसे सांस लेने में तकलीफ होगी और बुखार आ सकता है।

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