वरुण गांधी ने पत्र में यूपी सरकार और केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा भी की है, लेकिन उन्होंने कहा है कि बदले हुए समय में इन्हें और अधिक किया जाना चाहिए। वरूण गांधी ने कहा है कि अगर मनरेगा मजदूरों को कृषि कार्यों में भी लगाए जाने की अनुमति दे दी जाती है तो इससे किसानों की कृषि लागत कम करने में मदद मिलेगी। यह किसानों की प्रमुख मांग है जिसे सरकार ने अब तक स्वीकार नहीं किया है।
चार साल में मात्र 10 रुपये बढ़ाया गन्ने का मूल्य
भाजपा सांसद ने कहा है कि उनके लोकसभा क्षेत्र के किसानों ने उनसे आग्रह किया है कि वे उनकी बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने में उनकी मदद करें और वे वही कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि यूपी सरकार ने पिछले चार साल में गन्ने के मूल्य में केवल 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है, जबकि इसी दौरान महंगाई में भारी वृद्धि हुई है। बिजली-पानी-डीजल-बीज-खाद जैसी सभी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इसलिए किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
गन्ना बकाया भुगतान भी पूरा नहीं किया
उन्होंने लिखा है कि गन्ना बकाया भुगतान अभी भी पूरा नहीं किया गया है, किसानों के पास अपनी पूरी फसल बेचने की सुविधा भी नहीं है जिससे उन्हें मजबूरन अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने पड़ रही है। अगर किसानों की पूरी फसलों की खरीद सुनिश्चित कर दी जाए तो इससे उन्हें अपनी फसल को कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
नई बिजली नीति को लेकर भी आंदोलन कर रहे किसानों के मन में भारी चिंता है। वरूण गांधी ने किसानों की इन चिंताओं को भी साझा किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को बिजली बिल के दाम कम करने चाहिए जिससे कृषि उपज का मूल्य कम किया जा सके। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों को प्रति वर्ष 6000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। लेकिन बढ़ी हुई महंगाई के कारण यह बहुत कम है जिसे बढ़ाकर कम 12,000 रुपये वार्षिक किया जाना चाहिए।
किसान संयुक्त मोर्चा के नेता अविक साहा ने कहा है कि किसानों के अधिकारों की मांग को आगे बढ़ाने में जो भी आगे आता है, उन सबका स्वागत है। यह कार्य किसी व्यक्ति के हित में नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के करोड़ों किसानों के हित की बात है। किसान नेता ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि कोरोना काल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में किसानों ने सबसे आगे बढ़कर भूमिका निभाई। जब सारे उद्योग धंधे चौपट हो गए, तब केवल किसान ही अपने मोर्चे पर डटे रहे और करोड़ों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का काम किया। उन्होंने कहा कि सरकारों के साथ-साथ पूरे देश को किसानों की समस्या को समझना चाहिए और उनका साथ देना चाहिए।
अविक साहा ने कहा कि इस मांग को किसी पार्टी या सरकार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारें आती-जाती रहती हैं, देश और इसका समाज हमेशा बरकरार रहता है। किसानों का मुद्दा पूरे देश का मुद्दा है और वरूण गांधी की तरह हर देशवासी को सामने आकर सरकार से यह बात करनी चाहिए जिससे सरकार किसानों के हित में शीघ्र ही यह कदम उठाए।