ओजस्वी भाषण, गंभीर चर्चा, समाज के मुद्दों की तरफ रुझान रखने वाले भाजपा के पूर्व महासचिव वरुण गांधी ने शुक्रवार को फिर ट्वीट किया। वीडियो ट्वीटकर कहा कि हत्या के जरिए किसानों को चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से खुद को बाहर किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। वरुण ने कहा कि पांच साल में शायद ही वह पार्टी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की किसी बैठक में शामिल हुए हों। वरुण की इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया के राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं।
भाजपा को महत्व नहीं दे रहे या कोई और बात?
वरुण गांधी कभी खुद को उत्तर प्रदेश से भाजपा के मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार मानते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले उन्होंने अपनी इस महत्वाकांक्षा के लिए काफी कोशिशें की थी, लेकिन 2014 के बाद से ही उन्हें राजनीति में कोई बड़ा अवसर हाथ नहीं लगा है। भाजपा मुख्यालय के गलियारे में तमाम नेता वरुण गांधी के नाम की चर्चा पर कोई महत्व नहीं देते। सभी सांसदों की तरह उन्हें वरुण गांधी एक सांसद की तरह ही लगते हैं। पिछले कुछ समय से वरुण गांधी के ट्वीट, किसानों के आंदोलन का समर्थन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखी उनकी चिट्ठी ने काफी सुर्खियां बटोर रखी हैं। लोगों का मानना है कि भाजपा ने कुछ इन्ही कारणों से अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी से वरुण गांधी को बाहर रखा है। इसके समानांतर वरुण गांधी की प्रतिक्रिया भी गौर करने वाली है।
किसी भी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी एक महत्वपूर्ण तथा प्रभावशाली मंच होता है। भाजपा की 80 सदस्यीय नई कार्यकारिणी में वरुण गांधी नहीं हैं। वरुण गांधी का कहना है कि पांच साल से वह इसकी किसी बैठक में शामिल ही नहीं हुए हैं। इसका अर्थ निकाला जा रहा है कि वरुण गांधी के लिए भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ही अब महत्वपूर्ण नहीं रह गई है। संभवत: वह यही कहना चाह रहे हैं। तभी पांच साल से इसकी बैठकों में शामिल ही नहीं हुए।