अमेठी कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है, एक तरह से कहें तो यह सीट राहुल को विरासत मे मिली थी। लेकिन इस बार कांगद्रेस की विरासत में स्मृति इरानी सेंध लगा सकती हैं। मतगणना चल रही है और शुरुआती रुझानों में स्मृति इरानी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से आगे चल रही हैं।
अमेठी में मुकाबला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी के बीच है। सपा-बसपा गठबंधन ने पहले ही इस बात की घोषणा पहले कर दी थी कि वो कांग्रेस के गढ़ में अपने प्रत्याशी नहीं उतारेंगे। लेकिन अब ये गढ़ खिसकता नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि-
- इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि राहुल गांधी इस सीट को अपनी विरासत समझकर स्मृति इरानी की चुनौती को गंभीरता से नहीं लिए।
- 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद स्मृति ईरानी लगातार अमेठी जाती रहीं और वहां कई विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया।
- अमेठी की जनता यह यह भी कहने लगी थी कि स्मृति की वजह से राहुल गांधी अमेठी आने लगे, वरना वे पांच साल में एक बार चुनाव में ही यहां आते थे।
- स्मृति इरानी न केवल फेसबुक, ट्विटर बल्कि अपने लोकसभा क्षेत्र अमेठी में लगातार बनी रहीं और लोगों से मिलती रहीं, 5 साल में कई बार स्मृति अमेठी गईं और अमित शाह ने उनके लिए रोड शो भी किया था।
- अमेठी को लेकर राहुल गांधी कहीं न कहीं डरे हुए थे इसीलिए उन्होंने केरल के वायनाड से नामांकन किया। इसका अनुमान पहले भी लगाया गया था। बता दें कि 2014 में अमेठी में स्मृति इरानी ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी और उनके जीत के अंतर को कम कर दिया था।