कांग्रेस को पंजाब में नया सरदार मिलने के बाद सियासी खींचतान पर विराम लगने की उम्मीद थी, लेकिन पंजाब प्रभारी हरीश रावत की टिप्पणी ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया।
रावत की टिप्पणी पर चौतरफा घिरी कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि पंजाब चुनाव में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू दोनों ही पार्टी के चेहरे होंगे।
दरअसल, हरीश रावत ने कहा था कि पंजाब चुनाव में सिद्धू कांग्रेस का चेहरा होंगे। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव चन्नी और सिद्धू दोनों के नेतृत्व में लड़ेगी।
उन्होंने भाजपा, अकाली दल, बसपा और आम आदमी पार्टी पर एक दलित मुख्यमंत्री का अपमान करने का आरोप लगाया। चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री चुने जाने पर नेतृत्व के फैसले खासकर राहुल गांधी की भूमिका को भविष्य का दूरदर्शी कदम बताया जा रहा था, लेकिन रावत के बयान ने उसे नई दिशा में मोड़ दिया।
रावत के नवजोत सिंह सिद्धू को भविष्य का चेहरा बता देने के बयान के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक नेताओं को सफाई देने के लिए उतरना पड़ा। बसपा नेता मायावती, आम आदमी पार्टी और भाजपा ने भी रावत के बयान के आधार पर चन्नी को डमी सीएम बताकर कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाकर मुश्किलें बढ़ा दीं। इधर, रावत ने अपने बयान का ठीकरा फिर मीडिया पर फोड़ दिया।
दलित का बेटा सीएम बना तो मायावती को एतराज क्यों
कांग्रेस ने मायावती और विपक्ष के चन्नी को लेकर दिए जा रहे बयानों पर कहा कि एक दलित को सीएम बनाने पर विपक्ष के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? कांग्रेस ने इतिहास रचा है पंजाब में पहली बार एक दलित, शोषित, पिछड़े वर्ग के युवा को मुख्यमंत्री बनाया है। मायावती को एक दलित के बेटे को सीएम बनाए जाने पर ऐतराज क्यों है?
चन्नी अगले चुनाव में भी कांग्रेस का चेहरा होंगे। उन्हें तो इसकी प्रशंसा करनी चाहिए थी। एक दलित का विरोध शोभा नहीं देता है। कांग्रेस ने चुनौती देते हुए कहा, बसपा-अकाली दल एक दलित को साझा उम्मीदवार घोषित करें, उनकी विश्वसनीयता तभी साबित होगी।
पंजाब का प्रभार छोड़ने की रावत की इच्छा जल्द होगी पूरी
कांग्रेस नेतृत्व पंजाब प्रभारी हरीश रावत की प्रभार छोड़ने की इच्छा जल्द ही पूरी कर देगा। कहने को पंजाब में सब ठीक होने के बाद रावत को उत्तराखंड चुनाव के लिए मुक्त किया जाना है लेकिन नेतृत्व को भी अब लगने लगा है कि बतौर प्रभारी हरीश रावत की हाल की बयानबाजी ने पंजाब में चीजों को उलझाया जिसने आग में घी का काम किया है।
चन्नी के फैसले पर नेतृत्व वाहवाही और राजनीतिक संदेश की उम्मीद लगाए था, लेकिन रावत के बयान ने पार्टी की चुनावी रणनीति और महत्वपूर्ण फैसले पर पानी फेर दिया।