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यूपी चुनावः मजबूत छवि के पीछे छूटे जमीनी मुद्दे, योगी से निपटने के लिए अखिलेश कैंप ने बनाई यह खास रणनीति

अमित शर्मा
Updated Sun, 27 Feb 2022 05:51 PM IST

सार

ध्यान देने वाली बात है कि भाजपा ने इस बार यूपी चुनाव में प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बड़े चेहरे के रूप में भुनाने का प्रयास नहीं किया है। उसकी योजनाओं के केंद्र में योगी आदित्यनाथ ही हैं।
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अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala


माना जा रहा है कि प्रदेश में एक वर्ग ऐसा है जो महंगाई-बेरोजगारी और आवारा पशुओं के कारण पैदा हुई समस्या के बाद भी योगी को वापस लाना चाहता है, तो दूसरा वर्ग राशन-पेंशन और आवास योजना का लाभ पाने के बाद भी उन्हें हटाना चाहता है। समाजवादी पार्टी ने बेहद चतुराई के साथ योगी आदित्यनाथ की इस छवि से निपटने की रणनीति बनाई है। उसने अखिलेश यादव को काम करने वाले, किसी विवाद से दूर रहकर नौकरी देने और विकास करने वाले नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। सपा की यह कोशिश कितनी कामयाब रही, यह तो 10 मार्च को ही पता चलेगा।




योजनाओं के केंद्र में योगी आदित्यनाथ ही

ध्यान देने वाली बात है कि भाजपा ने इस बार यूपी चुनाव में प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बड़े चेहरे के रूप में भुनाने का प्रयास नहीं किया है। उसकी योजनाओं के केंद्र में योगी आदित्यनाथ ही हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी अपनी रैलियों में योगी आदित्यनाथ की छवि ही मजबूत करते हुए दिखाई पड़ते हैं। योगी को यूपी के लिए उपयोगी बताना और हर जगह योगी सरकार के द्वारा सुरक्षा के लिए किए गए कार्य को उभारना भाजपा की इसी रणनीति का हिस्सा है। बड़ा सवाल है कि कथित रूप से मोदी-योगी के बीच केंद्र में संभावित टक्कर के खतरे के बीच भी मोदी-शाह की जोड़ी यह रणनीति क्यों अपना रही है?


राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय का मानना है कि चूंकि यह चुनाव लोकसभा का नहीं, बल्कि यूपी की सत्ता हासिल करने का है। ऐसे में यदि भाजपा मोदी के चेहरे को भुनाने की कोशिश करती, तो सपा लोगों के बीच यह बात स्थापित कर सकती थी कि शासन तो यूपी में चलाना है जहां नरेंद्र मोदी नहीं आने वाले हैं। लिहाजा यूपी के संदर्भ में अखिलेश यादव का चेहरा मजबूत पड़ सकता था। लेकिन जैसे ही भाजपा ने योगी बनाम अखिलेश के मुद्दे को हवा दी, सुरक्षा के मुद्दे पर योगी भारी पड़ते दिखाई पड़ने लगे। ऐसे में माना जा सकता है कि यह भाजपा की सुनियोजित रणनीति है।


सुनील पांडेय कहते हैं कि यदि भाजपा मोदी के चेहरे को भुनाने की कोशिश करती और अगर यूपी में भाजपा हार जाती है, तो 2024 में यूपी में भाजपा की संभावनाएं कमजोर हो जातीं। भाजपा यूपी से 2014 में 73 और 2019 में 62 सीटें जीतने में सफल रही थी। ऐसे में भाजपा 2024 की संभावनाओं को कभी कमजोर नहीं करना चाहेगी। 


यह भी याद रखना चाहिए कि प्रधानमंत्री मोदी की टीम पूरी कोशिश के बाद भी ममता बनर्जी के सामने पश्चिम बंगाल में बौनी साबित हुई थी। यदि इसी तरह मोदी कुछ और राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं के सामने कमजोर पड़ते हैं तो भी इससे 2024 की संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ता है। भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि उसका प्रधानमंत्री उम्मीदवार क्षेत्रीय नेताओं के सामने (संभावित हार की स्थिति में) कमजोर होता दिखाई पड़े। लिहाजा किसी भी दृष्टि से भाजपा के लिए यूपी चुनाव में मोदी की छवि को ज्यादा भुनाना उचित नहीं था।


योगी की छवि का मिलेगा लाभ

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला से स्वीकार किया कि इस चुनाव में चेहरे प्रमुख हो गए हैं और मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। यह देश के लिए अच्छा है या बुरा, यह अलग बात है, लेकिन फिलहाल यूपी में चुनाव योगी बनाम अखिलेश के बीच सिमटता दिखाई पड़ रहा है। संघ नेता का मानना है कि योगी आदित्यनाथ अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने, कोरोना काल में हर गरीब परिवार तक राशन-पेंशन योजनाओं का लाभ पहुंचाने और लगातार विकास की योजनाओं (एयरपोर्ट, एक्सप्रेस हाइवे, मेट्रो और अन्य स्थानों के विकास) के कारण अखिलेश यादव पर भारी पड़ते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। भाजपा को इसका चुनाव में लाभ मिलना तय है। हालांकि, योगी की छवि से कुछ लोगों को परेशानी है। उसका नुकसान होना भी तय है।
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सपा ने बनाई यह रणनीति

  • समाजवादी पार्टी के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता ने अमर उजाला से कहा कि हम इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि भाजपा इस रणनीति पर खेलने की कोशिश करेगी। वह योगी आदित्यनाथ की छवि को भुनाने की कोशिश करेगी, इसीलिए चुनाव की शुरुआत से ही हमने पूरी रणनीति के केंद्र में केवल अखिलेश यादव को फोकस में रखा। पार्टी के नारों में भी केवल ‘अखिलेश आ रहे हैं’ का भरोसा दिया गया। पार्टी के स्टार प्रचारकों में भी ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया गया जिनके नाम-काम पर विवाद हो सकता था। यह पार्टी की रणनीति के अंतर्गत ही हुआ।
  • उन्होंने कहा कि ब्रांड अखिलेश को स्थापित करने में हमने केवल विकास और सकारात्मक बिंदुओं को ही उठाया। 2012 की अखिलेश सरकार में किए गए काम ही हमारी योजना का आधार बने। सड़कों का विकास, नौकरी देने वाले नेता और लोगों की बात सुनने वाले, सब तक आसान पहुंच में आने वाले नेता के रूप में उन्हें स्थापित करने की रणनीति बनी जिसका हमें लाभ भी मिलता दिख रहा है।
  • सपा नेता के अनुसार भाजपा ने जहां योगी आदित्यनाथ को बुल्डोजर से तोड़-फोड़ करने वाले और एक संप्रदाय विशेष के प्रति नकारात्मक भाव रखने वाले नेता के रूप में भुनाने की कोशिश की, वहीं हमने अखिलेश को हर वर्ग का ध्यान रखने वाले और विकास करने वाले नेता के रूप में स्थापित करने का काम किया। 
  • सपा नेता ने कहा कि भारतीय जनता किसी के प्रति नकारात्मक भाव को भी एक सीमा से ज्यादा स्वीकार नहीं करती है चाहे यह नकारात्मक कार्य किसी अपराधी के लिए ही क्यों न किया गया हो। उन्होंने दावा किया कि हमें इस रणनीति का लाभ मिल रहा है और अखिलेश सबको साथ लेकर चलने वाले नेता के रूप में उभरे हैं। उन्होंने कहा कि इस छवि के सहारे सपा जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी।  
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