भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए 107 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ेंगे। वहीं उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी जिले की सिराथू से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। आगरा ग्रामीण से बेबीरानी मौर्य चुनाव लड़ेंगी। पहले वे उत्तराखंड की राज्यपाल रहीं हैं। इस सूची में 21 नए चेहरे हैं।
भाजपा की पहली सूची में 44 ओबीसी, 19 एससी और 10 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा छोड़ने वाले कई नेताओं ने भाजपा पर दलित और पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि पहली सूची के जरिए भाजपा ने उन आरोपों पर जवाब देने की कोशिश की है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने एक सामान्य सीट पर भी एससी उम्मीदवार को टिकट दिया है। पार्टी ने सहारनपुर की सामान्य सीट से दलित नेता जगपाल सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।
नेताओं के पार्टी छोड़ने से सतर्क हुई भाजपा
भाजपा ने जो पहली सूची जारी की है उसमें 83 मौजूदा विधायकों में से 63 को टिकट दिया गया है, जबकि 20 विधायकों के टिकट काटे गए हैं। जबकि पहले कहा जा रहा था कि भाजपा खराब प्रदर्शन करने वाले 40 से 50 फीसदी विधायकों के टिकट काट सकती है, लेकिन माना जा रहा है कि पिछले दो-तीन दिनों के घटनाक्रम के बाद भाजपा इस मुद्दे पर सतर्क हुई है और इसी वजह से पार्टी ने अधिक से अधिक विधायकों के टिकट काटने की अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी के यूपी प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ‘पार्टी चुनाव जीतने के लिए चुनाव लड़ती है। टिकट वितरण में जीत के फैक्टर के अलावा पार्टी के प्रति समर्पण को भी ध्यान में रखा गया है।
गोरखपुर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए 107 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ेंगे। वहीं उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी जिले की सिराथू से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। आगरा ग्रामीण से बेबीरानी मौर्य चुनाव लड़ेंगी। पहले वे उत्तराखंड की राज्यपाल रहीं हैं। इस सूची में 21 नए चेहरे हैं।
भाजपा की पहली सूची में 44 ओबीसी, 19 एससी और 10 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा छोड़ने वाले कई नेताओं ने भाजपा पर दलित और पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि पहली सूची के जरिए भाजपा ने उन आरोपों पर जवाब देने की कोशिश की है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने एक सामान्य सीट पर भी एससी उम्मीदवार को टिकट दिया है। पार्टी ने सहारनपुर की सामान्य सीट से दलित नेता जगपाल सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।
नेताओं के पार्टी छोड़ने से सतर्क हुई भाजपा
भाजपा ने जो पहली सूची जारी की है उसमें 83 मौजूदा विधायकों में से 63 को टिकट दिया गया है, जबकि 20 विधायकों के टिकट काटे गए हैं। जबकि पहले कहा जा रहा था कि भाजपा खराब प्रदर्शन करने वाले 40 से 50 फीसदी विधायकों के टिकट काट सकती है, लेकिन माना जा रहा है कि पिछले दो-तीन दिनों के घटनाक्रम के बाद भाजपा इस मुद्दे पर सतर्क हुई है और इसी वजह से पार्टी ने अधिक से अधिक विधायकों के टिकट काटने की अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी के यूपी प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ‘पार्टी चुनाव जीतने के लिए चुनाव लड़ती है। टिकट वितरण में जीत के फैक्टर के अलावा पार्टी के प्रति समर्पण को भी ध्यान में रखा गया है।
गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे?
अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री के मुताबिक पहले योगी आदित्यनाथ के अयोध्या या मथुरा से चुनाव लड़ने की संभावना थी, लेकिन माना जा रहा है कि किसान आंदोलन का पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुख्य असर पड़ने के कारण पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है, संभवत: इसलिए योगी यहां से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। चूंकि पार्टी उनके काम के नाम पर ही वोट मांग रही है, इसलिए यदि वे मथुरा से चुनाव लड़ते तो मुख्यमंत्री को चुनाव प्रचार के लिए यहां ज्यादा समय देना पड़ता।
पार्टी जोखिम नहीं लेना चाहती
योगी के अयोध्या से चुनाव नहीं लड़ने के पीछे की वजह बताते हुए विनोद अग्निहोत्री कहते हैं, सभी मान रहे थे कि सीएम अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में जाने की जो घटना हुई है, उससे अयोध्या के अतिपिछड़ों के बीच में अच्छा संदेश नहीं गया और यह माना गया कि अब सपा इस वर्ग में घुसपैठ कर सकती है। इसलिए पार्टी यहां कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। गोरखपुर उनकी सुरक्षित सीट है, उन्हें यहां ज्यादा समय नहीं देना पड़ेगा और वे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी चुनाव प्रचार में अपना पूरा वक्त दे सकते हैं। गोरखपुर सीएम योगी के लिए सुरक्षित सीट है और वे यहां से पांच बार सांसद भी रह चुके हैं।
अयोध्या में योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
योगी नहीं मोदी को अयोध्या का श्रेय देना चाहती भाजपा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी के मुताबिक योगी खुद को भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेसडर मानते हैं और माना जा रहा था कि यदि वे अयोध्या से चुनाव लड़ते तो न केवल यूपी बल्कि पूरे देश में राम मंदिर का ज्वार उभरता। इस चुनाव कवरेज के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी पहुंचेगी और अयोध्या में योगी-योगी होता। इसमें जोखिम यह था कि अयोध्या में राममंदिर बनाने का जो श्रेय पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को देना चाहती है, वह योगी को मिल जाता। जबकि अयोध्या में योगी के चुनाव लड़ने की तैयारी हो गई थी और उनके लिए बंग्ले की तलाश भी शुरू हो गई थी।
सपा में शामिल होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी।
- फोटो : ANI
करीब 60 फीसदी दलित और ओबीसी को टिकट
राम दत्त त्रिपाठी के मुताबिक 107 उम्मीदवारों की पहली सूची में भाजपा ने दलित और ओबीसी मिलाकर करीब 60 फीसदी उम्मीदवारों को टिकट दिया है और एक सामान्य सीट से भी दलित को टिकट दिया है। पार्टी, स्वामी प्रसाद मौर्य और अन्य ओबीसी नेताओं के सपा में जाने के बाद जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। स्वामी प्रसाद मौर्या और धर्म सिंह सैनी जो भाजपा की योगी सरकार में मंत्री रहे, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ अगड़ों की पार्टी है और उसने दलितों और पिछड़ों को धोखा दिया है।
दलित-ओबीसी को मनाने की कोशिश
राम दत्त त्रिपाठी कहते हैं ज्यादा से ज्यादा दलित-ओबीसी को टिकट देकर पार्टी ने इस वर्ग को मनाने की कोशिश की है, क्योंकि यह वर्ग अब सत्ता में हिस्सेदारी चाहता है। पिछले चुनाव में इस वर्ग के वोट पार्टी को खूब मिले थे और माना जा रहा था कि केशव प्रसाद मौर्य मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और लग रहा है कि इस बार भी पार्टी योगी के नाम पर ही चुनाव लड़ रही है, लिहाजा पार्टी को किसी न किसी तरह इस वर्ग को सत्ता में भागीदारी देनी थी।
किसान आंदोलन (फाइल फोटो)
- फोटो : Agency
पश्चिम यूपी में कोई नया प्रयोग नहीं
जानकारों का मानना है कि पश्चिम यूपी में भाजपा किसी तरह के प्रयोग करने से बची है, क्योंकि किसान आंदोलन का प्रभाव यहां सबसे ज्यादा रहा है। इसे देखते हुए ज्यादतर मौजूदा विधायकों को टिकट दिए गए हैं। जबकि पहले यह माना जा रहा था कि ज्यादतर सीटों पर कई विधायकों के टिकट काटे जा रहे हैं।
दूसरी पार्टी से आए नेताओं को मिला टिकट
टिकट बंटवारे में इस बात का ध्यान जरूर रखा गया है कि जो दूसरी पार्टियों से नेता आए हैं उन्हें टिकट दिया गया है। जैसे बेहट विधानसभा सीट पर कांग्रेस के विधायक नरेश सैनी हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं, उन्हें पार्टी ने यहीं से टिकट दिया है। ऐसे ही छपरौली जो राष्ट्रीय लोक दल की गढ़ मानी जाती है, एकमात्र सीट लोकदल यहीं से जीती थी। सहेंद्र सिंह रामाला ने भाजपा प्रत्याशी सत्येंद्र सिंह को यहां 2017 में पटखनी दी थी और जीतने के तुरंत बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। पार्टी ने उन्हें इसी सीट से उम्मीदवार घोषित किया है।
हालांकि पार्टी ने मेरठ शहर में अपना उम्मीदवार बदल दिया है। यहां का इतिहास रहा है कि भाजपा एक बार यहां सीट हारती है तो दूसरी बार जीतती है। यहां कमल दत्त शर्मा युवा प्रत्याशी हैं और पार्टी ने उन्हें मौका दिया है।