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UP Assembly Election 2022: क्या भाजपा के ट्रैप में फंस रही कांग्रेस, हिंदुत्व को लेकर क्यों बंटी नजर आ रही पार्टी

प्रतिभा ज्योति
Updated Fri, 12 Nov 2021 06:36 PM IST

सार

भाजपा ने राहुल गांधी पर हिंदू विरोधी होने और वोट की राजनीति करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता पर यह आरोप तब लग रहे हैं जब यूपी चुनाव में पार्टी नरम हिंदुत्व की राह पर चल रही है। 
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पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter Congress @INCIndia
हिंदू और हिंदुत्व को लेकर कांग्रेस एक नए विवाद में फंस गई है। एक के बाद एक करके कांग्रेस नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जिसने भारतीय जनता पार्टी को विरोध के सारे तीर तरकश से निकालने का एक सुनहरा मौका दे दिया है। हिंदुत्व पर कांग्रेस नेताओं के बयान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है और माना जा रहा है कि यूपी चुनाव में भाजपा के लिए एक बार फिर यह बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है, क्योंकि चुनावों से पहले हिंदुत्व पर विवाद भाजपा का आजमाया हुआ नुस्खा है। पहले पढ़िए, कांग्रेस नेताओं ने हिंदुत्व पर क्या कहा है।

1. बुधवार को कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ आई जिसमें हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम से की गई। इस किताब को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है और मध्यप्रदेश में उनकी किताब पर प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है।


2. कांग्रेस के दूसरे नेता राशिद अल्वी ने यूपी के संभल में एक कार्यक्रम में कथित तौर पर रामायण का एक प्रसंग सुनाते हुए जय श्रीराम कहने वालों की तुलना राक्षस से कर डाली। बताया जा रहा है कि अल्वी ने कहा इन दिनों जय श्रीराम बोलने वाले कुछ लोग संत नहीं है, बल्कि राक्षस हैं। इस बयान से पहले राशिद अल्वी ने रामायण के उस प्रसंग का जिक्र किया, जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय जा रहे थे और संत के वेष में एक राक्षस ने उन्हें रोकने का मायाजाल रचा था। अल्वी के इस बयान पर भाजपा उन पर हमलावर है। भाजपा का कहना है रामभक्तों के प्रति कांग्रेस के विचारों में जहर है। हालांकि अल्वी ने अपने इस बयान से इंकार किया है।

3. शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'जन जागरण अभियान' में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फर्क है। अगर फर्क नहीं होता तो नाम एक होता। हिंदू को हिंदुत्व की जरूरत नहीं होती?" राहुल गांधी ने आगे कहा क्या हिंदू धर्म किसी सिख या मुस्लिम को मारने का नाम है? लेकिन हिंदुत्व है। क्या हिंदू धर्म अखलाक को मारने के बारे में है? किस किताब में ये लिखा है? मैंने उपनिषद पढ़ा है उसमें नहीं लिखा है। किस हिंदू धर्म की किताब में लिखा है कि किसी बेगुनाह को मार सकते हैं? मैंने नहीं पढ़ा है. लेकिन हिंदुत्व में मैं इसे देख सकता हूं।"

अब जानिए गुरुवार को कांग्रेस के एक दूसरे वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने किस तरह सलमान खुर्शीद की बातों से अपनी असहमति जताई थी और हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस या जिहादी इस्लाम से करने को गलत बताया था।

 
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पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter Congress @INCIndia
हिंदू और हिंदुत्व को लेकर कांग्रेस एक नए विवाद में फंस गई है। एक के बाद एक करके कांग्रेस नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जिसने भारतीय जनता पार्टी को विरोध के सारे तीर तरकश से निकालने का एक सुनहरा मौका दे दिया है। हिंदुत्व पर कांग्रेस नेताओं के बयान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है और माना जा रहा है कि यूपी चुनाव में भाजपा के लिए एक बार फिर यह बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है, क्योंकि चुनावों से पहले हिंदुत्व पर विवाद भाजपा का आजमाया हुआ नुस्खा है। पहले पढ़िए, कांग्रेस नेताओं ने हिंदुत्व पर क्या कहा है।

1. बुधवार को कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ आई जिसमें हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम से की गई। इस किताब को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है और मध्यप्रदेश में उनकी किताब पर प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है।

2. कांग्रेस के दूसरे नेता राशिद अल्वी ने यूपी के संभल में एक कार्यक्रम में कथित तौर पर रामायण का एक प्रसंग सुनाते हुए जय श्रीराम कहने वालों की तुलना राक्षस से कर डाली। बताया जा रहा है कि अल्वी ने कहा इन दिनों जय श्रीराम बोलने वाले कुछ लोग संत नहीं है, बल्कि राक्षस हैं। इस बयान से पहले राशिद अल्वी ने रामायण के उस प्रसंग का जिक्र किया, जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय जा रहे थे और संत के वेष में एक राक्षस ने उन्हें रोकने का मायाजाल रचा था। अल्वी के इस बयान पर भाजपा उन पर हमलावर है। भाजपा का कहना है रामभक्तों के प्रति कांग्रेस के विचारों में जहर है। हालांकि अल्वी ने अपने इस बयान से इंकार किया है।

3. शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'जन जागरण अभियान' में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फर्क है। अगर फर्क नहीं होता तो नाम एक होता। हिंदू को हिंदुत्व की जरूरत नहीं होती?" राहुल गांधी ने आगे कहा क्या हिंदू धर्म किसी सिख या मुस्लिम को मारने का नाम है? लेकिन हिंदुत्व है। क्या हिंदू धर्म अखलाक को मारने के बारे में है? किस किताब में ये लिखा है? मैंने उपनिषद पढ़ा है उसमें नहीं लिखा है। किस हिंदू धर्म की किताब में लिखा है कि किसी बेगुनाह को मार सकते हैं? मैंने नहीं पढ़ा है. लेकिन हिंदुत्व में मैं इसे देख सकता हूं।"

अब जानिए गुरुवार को कांग्रेस के एक दूसरे वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने किस तरह सलमान खुर्शीद की बातों से अपनी असहमति जताई थी और हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस या जिहादी इस्लाम से करने को गलत बताया था।

 

कांग्रेस के जी23 समूह के नेता गुलाम नबी आजाद और गांधी परिवार के करीबी सलमान खुर्शीद (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
ग़ुलाम नबी आजाद ने ट्वीट करते हुए कहा था, "सलमान ख़ुर्शीद अपनी नई किताब में भले ही हिंदुत्व को हिंदू धर्म की मिलीजुली संस्कृति से अलग एक राजनीतिक विचारधारा मानकर इससे असहमति जताएं. लेकिन हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और जिहादी इस्लाम से करना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है।"

ये उदाहरण यह समझने के लिए दिए गए हैं क्या हिंदुत्व को लेकर कांग्रेस बंटी हुई नजर आ रही है? क्या हिंदुत्व पर विवाद छेड़कर यूपी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मुद्दा थमा रही है और उसकी जीत की राह आसान बना रही है। भारतीय जनता पार्टी ने भी मानों मौके को लपक लिया है इसलिए वह कांग्रेस पर हमलावर है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस के नेता हिंदुत्व पर राहुल गांधी के इशारे पर बोलते हैं। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को भी संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। कांग्रेस नेताओं का बयान संयोग नहीं प्रयोग है।

जानकार कहते हैं कि ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के कुछ नेता 'नरम हिंदुत्व' के पार्टी के दृष्टिकोण को समझ ही नहीं पा रहे हैं इसलिए एक तरफ जहां प्रियंका गांधी नरम हिंदुत्व की नाव पर सवार हैं वहीं पार्टी के नेता हिंदुत्व पर बयानबाजी करके पार्टी की रणनीति के उलट चल रहे हैं। 

समय कंफ्यूज रहने का नहीं है
वहीं पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पूरा विवाद बेवजह का है और इसकी टाइमिंग ठीक नहीं है। उत्तर प्रदेश से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व पर अलग-अलग बातें करके पार्टी कंफ्यूज नजर आ रही है। क्या यह वक्त कंफ्यूज रहने का है? आप क्या चाहते हैं यह साफ करें। नीति और नीयत को साफ रखना होगा। क्या वे यह जान पा रहे हैं कि वे जो कहना चाह रहे हैं मतदाता उन्हें कितना समझ पा रहे हैं। 

 

प्रियंका गांधी ने दतिया में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। - फोटो : सोशल मीडिया
विचारधारा को लेकर कांग्रेस स्पष्ट नहीं
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी भी मानती हैं, "कांग्रेस के नेताओं के बयान में कोई समानता आपको इसलिए नजर नहीं आ रही है क्योंकि पार्टी को एकजुट रखने वाला ऐसा कोई नेतृत्व नहीं है जो सबको स्वीकार्य हो। यही वजह है कि वे भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला तो करना चाहते हैं लेकिन वे अपनी विचारधारा को लेकर स्पष्ट नहीं है। इसलिए आज कांग्रेस नेताओं में भी हिंदुत्व को परिभाषित करने की होड़ लगी हुई है।"

जानकार बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी तो यही चाहती है कि कांग्रेस उसके ट्रैप में फंसे, क्योंकि कांग्रेस अभी नरम हिंदुत्व की राह पर पकड़े हुए है। कहीं न कहीं भाजपा को यह लग रहा था कि हिंदुत्व जो उसका मुख्य आधार है, कांग्रेस भी उसी राह पर चली तो कुछ सीटों पर उसका नुकसान हो सकता है। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में सुधार और 2018 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जीत में राहुल की मंदिर पॉलिटिक्स का भी बड़ा योगदान माना गया था। उसके बाद से कांग्रेस ने नरम हिंदुत्व को अपनी चुनावी रणनीति का स्थायी हिस्सा बनाने की रणनीति बना ली है। इसलिए पार्टी महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी भी चंदन टीका लगाए मंदिरों के दर्शन करती हुई नजर आ रही हैं।

मुस्लिम तुष्टिकरण की छवि से बाहर निकलने की कोशिश 
जबकि 2017 से पहले तक कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगता रहा है और उसे मुस्लिम समर्थक पार्टी के तौर पर देखा जाता रहा है। पार्टी इसी छवि से बाहर निकलना चाहती है। राजनीतिक मजबूरी ने कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टीकरण की अपनी नीति के बजाए बहुसंख्यक हिंदुओं को ओर देखने की नीति अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। पर सूत्रों का कहन है कि पार्टी के अंदर कुछ नेता ऐसे हैं जो सभ्यतागत मूल्यों को खतरे में पड़ता देख कुछ बोलने के लिए छटपटा रहे हैं।


 

सलमान खुर्शीद - फोटो : Amar Ujala Digital
कट्टर सोच रखने वालों की होती है आलोचना 
यूपी की राजनीति को गहराई से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी इस छटपटाहट को कुछ इस तरह समझाते हैं। वे कहते हैं जो लोग हिंदुत्व की आलोचना करते हैं वे सनातन हिंदू धर्म की आलोचना नहीं कर रहे बल्कि कुछ कट्टरपंथी सोच रखने वालों के बारे में बात करते हैं। सलमान खुर्शीद की जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है उसमें भी उन्होंने कट्टरवाद की राह पर चलने वालों के खिलाफ लिखा है। लेकिन भाजपा के पास ऐसी मशीनरी है, वो हर बात को मुद्दा बना लेती है। चुनाव करीब हैं तो वह कांग्रेस नेताओं के इन बयानों को भी मुद्दा बनाएगी, लेकिन उनके डर से लोग सच्चाई बोलने से खामोश तो नहीं रहेंगे। वे मानते हैं कि कांग्रेस को इससे कितना फायदा होगा यह पता नहीं लेकिन कोई नुकसान नहीं होगा। 

राहुल के बयान से विवाद गहराया 
वहीं एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि कांग्रेस नेताओं को अभी इस तरह के किसी भी विवाद से बचने की जरूरत है जो भाजपा को चुनावी फायदा उठाने में मदद करे। राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद कांग्रेस के भीतर यह विवाद ज्यादा गहराया हुआ लगता है, जिस पर पार्टी के लिए सफाई देना मुश्किल हो सकता है। वे कहते हैं यह यूपी में सियासी नुकसान की एक बड़ी वजह भी बन सकती है। 

वहीं चुनाव विश्लेषक मनीषा प्रियम की राय में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास कोई विरासत नहीं है, जमीन पर कोई आधार नहीं है। इसलिए उनके कुछ नेता यदि यह सोचकर बयान दे रहे हैं कि कुछ मुस्लिम वोट उन्हें मिल जाएंगो तो वे गलत सोच रहे हैं। 

 
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