आकांक्षा कुमारी : भूमिगत कोयला खदान में काम करने वाली देश की पहली महिला इंजीनियर
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आकांक्षा कुमारी ने कोयला मंत्रालय के तहत सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की पहली महिला खनन इंजीनियर बनने का गौरव हासिल किया है। केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने इस उपलब्धि पर आकांक्षा को ट्वीट कर बधाई दी है। अपने संदेश में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आकांक्षा कुमारी की यह उपलब्धि दूसरी महिलाओं को प्रेरित करेगीं। उन्होंने कहा भूमिगत कोयला खदानों में काम करने की अनुमति देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के साथ उनके लिए और अधिक अवसर पैदा करने के कार्य में प्रगतिशील शासन का वास्तविक उदाहरण पेश किया है।
खान मंत्रालय के मुताबिक उन्होंने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के उत्तरी करनपुरा क्षेत्र में चूरी भूमिगत खान में कार्य करना शुरु कर दिया है। हालांकि यहां अभी महिला कर्मचारी अलग-अलग भूमिकाओं में हैं। वे अधिकारी और डॉक्टर से लेकर सुरक्षा गार्ड तक और यहां तक कि डंपर तथा शॉवेल जैसी भारी मशीन चलाने तक की जिम्मेदारियों को भी निभा रही हैं। लेकिन यह पहला मौका होगा जब दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनियों में एक सीसीएल में किसी महिला को खनन गतिविधियों में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा।
बचपन से ही थी खनन में दिलचस्पी
आकांक्षा महारत्न समूह कोल इंडिया लिमिटेड में दूसरी खनन इंजीनियर और भूमिगत कोयला खदान में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी की है। आकांक्षा ने कोयला खनन गतिविधियों को काफी करीब से देखा और बचपन से ही उनमें खनन कार्यों के प्रति रुचि थी। इसलिए उन्होंने धनबाद के बीआईटी सिंदरी में खनन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
कोल इंडिया लिमिटेड में शामिल होने से पहले आकांक्षा ने राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की बलरिया खान में तीन साल तक काम किया है। इस उपलब्धि का सारा श्रेय आकांक्षा अपने परिवार को देती हैं। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड में शामिल होना उनके बचपन के सपने का पूरा होने जैसा है और इसके लिए अब वह अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हैं।