भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक (आईएसी) विक्रांत ने पांच दिवसीय अपनी पहली समुद्री यात्रा रविवार को सफलतापूर्वक पूरी कर ली और इस 40,000 टन वजनी युद्धपोत की प्रमुख प्रणालियों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया। रक्षा पीआरओ ने इसकी जानकारी दी। आत्मनिर्भर भारत व मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुए देश के पहले विमानवाहक युद्धपोत विक्रांत का समुद्री परीक्षण बुधवार से शुरू हुआ था। जुलाई में इसके तटीय परीक्षण सफल रहे थे। उम्मीद है कि परीक्षण सफल रहे, तो विक्रांत 2022 में नौसेना की ताकत और बढ़ाएगा।
इससे पहले रक्षा मंत्रालय कार्यालय ने बुधवार को ट्वीट कर बताया था कि स्वदेशी विमान वाहक (IAC(P71) 'विक्रांत' के समुद्री परीक्षणों की शुरुआत हो चुकी है। ट्वीट में कहा गया है कि एयरक्राफ्ट कैरियर का स्वदेशी निर्माण 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया इनिशिएटिव' के लिए देश की खोज में एक जबरदस्त उदाहरण है।
नौसेना ने इसे देश के लिए 'गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक' दिन बताया है। नौसेना ने कहा है कि, 'भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है, जिसके पास स्वदेश में डिजाइन करने, निर्माण करने और अत्याधुनिक विमानवाहक जहाज तैयार करने की विशिष्ट क्षमता है।'
वाइस एडमिरल एके चावला ने की विक्रांत के कर्मचारियों से मुलाकात वाइस एडमिरल एके चावला, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ दक्षिणी नौसेना कमान ने स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) विक्रांत के कर्मचारियों से मुलाकात की और उन्हें अपनी पहली समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए बधाई दी।वाइस एडमिरल एके चावला ने आईएसी विक्रांत की पहली समुद्री यात्रा पर कहा कि वास्तव में यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। समुद्र में पांच दिनों के परीक्षण के बाद हम वापस कोच्चि जा रहे हैं। हम बड़े संतोष के साथ वापस जा रहे हैं। समर्पित टीम वर्क से यह संभव हुआ है।