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विक्रांत का ट्रायल: स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत की पहली समुद्री यात्रा पूरी, जानिए इसके बारे में सब कुछ

Mon, 09 Aug 2021 01:35 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुए देश के पहले विमानवाहक युद्धपोत विक्रांत का समुद्री परीक्षण बुधवार से ही शुरू हो गया था। नौसेना में शामिल करने से पहले इसे ट्रायल के लिए समुद्र में उतरा गया है।
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स्वदेशी विमान वाहक 'आईएसी पी71 'विक्रांत' - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक (आईएसी) विक्रांत ने पांच दिवसीय अपनी पहली समुद्री यात्रा रविवार को सफलतापूर्वक पूरी कर ली और इस 40,000 टन वजनी युद्धपोत की प्रमुख प्रणालियों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया। रक्षा पीआरओ ने इसकी जानकारी दी। आत्मनिर्भर भारत व मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुए देश के पहले विमानवाहक युद्धपोत विक्रांत का समुद्री परीक्षण बुधवार से शुरू हुआ था। जुलाई में इसके तटीय परीक्षण सफल रहे थे। उम्मीद है कि परीक्षण सफल रहे, तो विक्रांत 2022 में नौसेना की ताकत और बढ़ाएगा। 

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इससे पहले रक्षा मंत्रालय कार्यालय ने बुधवार को ट्वीट कर बताया था कि स्वदेशी विमान वाहक (IAC(P71) 'विक्रांत' के समुद्री परीक्षणों की शुरुआत हो चुकी है। ट्वीट में कहा गया है कि एयरक्राफ्ट कैरियर का स्वदेशी निर्माण 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया इनिशिएटिव' के लिए देश की खोज में एक जबरदस्त उदाहरण है।

नौसेना ने इसे देश के लिए 'गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक' दिन बताया है। नौसेना ने कहा है कि, 'भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है, जिसके पास स्वदेश में डिजाइन करने, निर्माण करने और अत्याधुनिक विमानवाहक जहाज तैयार करने की विशिष्ट क्षमता है।'

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आईएनएस विक्रांत के नाम पर किया
पहले स्वदेशी युद्धपोत 'विक्रांत' का नामकरण आईएनएस विक्रांत पर किया गया है। आईएनएस 'विक्रांत' ने 1971 युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई थी। यह अब रिटायर हो चुका है। नए स्वदेशी युद्धपोत का नाम 'आईएसी पी71 'विक्रांत' रखा गया है।  

23 हजार करोड़ रुपये लागत

  • IAC P71 विक्रांत की लागत करीब 23 हजार करोड़ रुपये है। 
  • यह 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। 
  • इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है।
  • इसकी स्पीड 52 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसमें 14 फ्लोर हैं। 
  • इस पर 1700 नौसैनिक तैनात किए जा सकते हैं। 
  • 30 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं।
  • इसे बनाने में 50 से ज्यादा भारतीय कंपनियों को काम मिला।
  • करीब 40 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला
  • महिला नौसैनिकों के लिए इसमें खास व्यवस्था की गई है।
  • इसमें महिला नौसैनिकों को भी तैनात किया जा सकता है।
  • यह एक बार में 7500 समुद्री मील की दूरी तय कर सकता है।
वाइस एडमिरल एके चावला ने की विक्रांत के कर्मचारियों से मुलाकात
वाइस एडमिरल एके चावला, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ दक्षिणी नौसेना कमान ने स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) विक्रांत के कर्मचारियों से मुलाकात की और उन्हें अपनी पहली समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए बधाई दी।

 

वाइस एडमिरल एके चावला ने आईएसी विक्रांत की पहली समुद्री यात्रा पर कहा कि वास्तव में यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। समुद्र में पांच दिनों के परीक्षण के बाद हम वापस कोच्चि जा रहे हैं। हम बड़े संतोष के साथ वापस जा रहे हैं। समर्पित टीम वर्क से यह संभव हुआ है।

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