जनता को पसंद है उनके विरोध का तरीका
प्रो. आनंद बताते हैं, प्रियंका गांधी के सामने उनके पति रॉबर्ट वाड्रा को लेकर भी दिक्कतें आती रही हैं। इन सबके बावजूद प्रियंका गांधी एक निडर नेता के तौर पर लोगों के सामने आई हैं। कांग्रेस पार्टी आज जिस दोराहे पर खड़ी है, वहां सबसे ज्यादा जरूरी है उसका जनता से जुड़ाव। यह पार्टी आज लोगों के साथ संपर्क नहीं रख पा रही है। प्रियंका गांधी ने संघर्ष की एक उम्मीद दिखाई है। उनके विरोध का तरीका लोगों को पसंद आ रहा है। कांग्रेस पार्टी में आज सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है। हां, नेताओं की भरमार है। ट्रेड यूनियन, दलित उत्थान और किसान, इन्हें लेकर कांग्रेस पार्टी हाशिये पर चली गई है। पार्टी के पास देश की जरूरत के साथ तालमेल करने वाला कार्यक्रम नहीं है। कांग्रेसी नेता अपनी ही राजनीति में ही उलझे हैं।
आम लोगों से जुड़ना होगा
भाजपा ने, 2014 में एक ऐसा मुद्दा उठाया, जिसके साथ अनेक समुदाय जुड़ गए। 'भ्रष्टाचार मुक्त भारत' इस नारे ने सभी को लुभाया। वही भाजपा आज हिंदुत्व की राजनीति को डंके की चोट पर आगे ले जा रही है। भविष्य की रूपरेखा के साथ जो पार्टी या नेता राजनीति नहीं करता, वह दिशाहीन हो जाता है। अगर सपा मुस्लिमों और यादवों का ख्याल रखती है, तो भाजपा हिंदुत्व के एजेंडे पर चलती है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय एकता खतरे में है, इसे लोगों के बीच नहीं ले जा सकी। देश में आर्थिक धुंध है, किसान बुनकरों की सुनवाई नहीं हो रही। सामाजिक एकता में जहर घोलने वाली राजनीति चल रही है। कांग्रेस पार्टी, इन मुद्दों को भुना नहीं सकी। प्रियंका गांधी पर कोई दाग नहीं है। आनंद कुमार के मुताबिक, वे ममता बनर्जी या मायावती से बेहतर हैं। उन्हें युवा होने का लाभ मिल सकता है, लेकिन जब वे पार्टी के 'वाहन' पर सवार होती हैं, तो मालूम पड़ता है कि वह तो पंचर है। प्रियंका को आम लोगों से जुड़ना होगा। कांग्रेस पार्टी, आज ट्विटर की राजनीति कर रही है। उन्हें इस पार्टी को प्रतिक्रिया की राजनीति से बाहर निकालना होगा।