अकेले झंडेवालान मंदिर का प्रति माह का संचालन खर्च लगभग पांच लाख रुपये आता है। मंदिर में 100 से ज्यादा कर्मचारी हैं जो साफ-सफाई, सुरक्षा, लिपिकीय और अन्य कार्यों में लगे हैं। मंदिर की एक गौशाला है जिसमें लगभग 300 गायों की देखरेख की जा रही है। इसके अलावा मंदिर संस्थान कई सामाजिक कल्याण केंद्र, जैसे गरीब महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखाना इत्यादि चलाता है। मंदिर संचालन के साथ-साथ इसके बिजली-पानी के बिल सहित तमाम खर्च होते हैं। लेकिन लगातार मंदिर के बंद रहने से उसके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
नंद कुमार सेठी ने कहा कि अगर बाजारों को नियमों के साथ खोलने की अनुमति दी जा सकती है तो मंदिरों को यही अनुमति क्यों नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीच में कुछ समय के लिए भक्तों के प्रवेश को अनुमति मिली थी, तब सभी भक्तों को सैनिटाइज करना, उनके शरीर का तापमान चेक करना और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए दर्शन कराया जा रहा था। भक्तों को फूल-माला या प्रसाद चढ़ाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी, ताकि कोई संक्रमण न हो सके। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पूरे नियमों का पालन करते हुए अब मंदिरों को खोलने की अनुमति मिलनी चाहिए।
बिड़ला मंदिर के प्रशासक विनोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने समाज के मस्तिष्क पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। लोगों में चिंता और अवसाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। मंदिरों के दर्शन करने और पूजा-पाठ करने से लोगों में सकारात्मकता का संचार होता है। ऐसे में सरकार को मंदिरों के सकारात्मक पक्ष को देखते हुए अब इन्हें खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
दिल्ली के कई बड़े मंदिरों के प्रशासकों की 29 जून को बिड़ला मंदिर में एक बैठक भी हुई थी। इस बैठक में बिड़ला मंदिर के प्रशासक विनोद कुमार मिश्रा, झंडेवालान मंदिर के प्रशासक नंदकुमार सेठी, कालकाजी मंदिर सुरेंद्रनाथ अवधूत सहित अनेक मंदिरों के प्रशासनिक अधिकारी और धार्मिक संत शामिल हुए थे। बैठक में शामिल सभी मंदिरों के अधिकारियों ने सरकार से अनुरोध किया था कि अब मंदिरों को खोलने की अनुमति जानी चाहिए।