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सर्वे में खुलासा: 48 फीसदी बच्चे भूले किताबें पढ़ना, 90 फीसदी अभिभावकों की मांग- जल्द खुलें स्कूल

सार

ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 28 फीसदी बच्चे सर्वे के समय नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे थे और 37 फीसदी नहीं पढ़ रहे थे। शहरों में 23 फीसदी पेरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों को ऑनलाइन तकनीक से पर्याप्त शिक्षा मिल रही है तो ग्रामीण भारत में ऐसा मानने वालों की संख्या महज आठ फीसदी है। गांवों के 75 फीसदी अभिभावक मानते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनके बच्चों की पढ़ने की क्षमता कम हो गई है...
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ऑनलाइन क्लास लेते छात्र - फोटो : ANI (File Photo)
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विस्तार
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कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से पढ़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब बच्चों को हुआ है। ग्रामीण स्कूलों के सिर्फ आठ फीसदी बच्चे ही ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं, तो शहरों में 24 फीसदी। वहीं ये भी देखने में आया कि शहरों में रहने वाले 42 फीसदी बच्चे कुछ शब्दों से ज्यादा नहीं पढ़ पा रहे हैं, वहीं ग्रामीण भारत में हालात ज्यादा खराब दिखाई दे रहे हैं यहां ऐसे बच्चे 48 फीसदी है। शहरों में 19 फीसदी बच्चे बिल्कुल पढ़ाई नहीं कर रहे थे, तो गांवों में ये आंकड़ा 37 फीसदी है।

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ये चौकाने वाले आंकड़े स्कूल चिल्ड्रेन ऑनलाइन एंड ऑफलाइन लर्निंग (स्कूल) सर्वे के हालिया सर्वे में निकलकर सामने आए है। संस्था द्वारा ये सर्वे अगस्त 2021 में 15 राज्यों में किया गया। इसमें असम, बिहार चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में किया गया। इस सर्वे में अपेक्षाकृत गरीब और वंचित बस्तियों पर ध्यान दिया गया। जहां अमूमन बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। जिन परिवारों से सर्वे में बात की गई है, उनमें से करीब 60 फीसदी परिवार ग्रामीण इलाके के हैं और करीब 60 फीसदी परिवार दलित व आदिवासी पृष्ठभूमि के हैं। इस सर्व का पहला राउंड अगस्त 2021 में 1362 घरों के कक्षा एक से आठ तक के 1362 बच्चों में किया गया।

अभिभावक चाहते हैं अब जल्द खुलें स्कूल

ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 28 फीसदी बच्चे सर्वे के समय नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे थे और 37 फीसदी नहीं पढ़ रहे थे। शहरों में 23 फीसदी पेरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों को ऑनलाइन तकनीक से पर्याप्त शिक्षा मिल रही है तो ग्रामीण भारत में ऐसा मानने वालों की संख्या महज आठ फीसदी है। गांवों के 75 फीसदी अभिभावक मानते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनके बच्चों की पढ़ने की क्षमता कम हो गई है। ग्रामीण भारत के 97 फीसदी और शहरी इलाके करीब 90 फीसदी अभिभावक चाहते हैं कि जल्द से जल्द स्कूल खोले जाएं।

ग्रामीण बच्चे नहीं समझ पा रहे स्कूल की आनलाइन पढ़ाई सामग्री

इस सर्वे में सामने आया कि देश के कई शहरों में ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बहुत सीमित है। शहरों में महज 24 फीसदी और गांवों में आठ प्रतिशत बच्चे ही नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। इसकी एक वजह यह है कि सर्वे के तौर पर लिए गए तमाम परिवारों में (ग्रामीण इलाकों में आधे) स्मार्टफोन नहीं हैं। जिन परिवारों में बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, उनमें नियमित रूप से पढ़ाई करने वालों का शहर में अनुपात 31 तो गांव में 15 फीसदी है। स्मार्टफोन अकसर कामकाजी बड़े लोगों के पास होते हैं वे ज्यादातर छोटे बच्चों को नहीं मिल पाते हैं।

सर्वे में सामने आया कि महज नौ फीसदी छात्र के पास अपना मोबाइल था। ग्रामीण इलाकों में ये भी देखा गया है कि जो बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें जो स्कूल से ऑनलाइन सामग्री भेजी जा रही है उसकी समझ नहीं है और बच्चों को भी ऑनलाइन पढ़ाई की समझ नहीं आ रही है या वे ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।

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