ठाणे के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने रविवार को आरोप लगाया है कि एक 28 वर्षीय आदिवासी महिला जो प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी, उसे एक सरकारी अस्पताल में कर्मचारियों ने करीब 11 घंटो कर सीढ़ियों पर बैठाए रखा। कार्यकर्ता प्रमोद पवार ने कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों ने महिला के रिश्तेदारों से पहले जांच कराकर लाने के लिए कहा, इस दौरान महिला दर्द से तड़पती रही।
प्रमोद पवार ने बताया कि यह घटना शहर के इंदिरा गांधी मेमोरियल (आईजीएम) अस्पताल में शनिवार को हुई। हालांकि, अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने इसे लेकर कहा कि हमें इस बात की जानकारी नहीं थी कि किसी गर्भवती महिला को अस्पताल के बाहर घंटों बैठाया गया। जैसे ही मुझे इस बारे में जानकारी मिली, हमने तुरंत महिला को अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था करवाई।
जब पवार और उनके संगठन को इस घटना के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने यह मुद्दा अस्पताल प्रशासन के सामने उठाया। बाद में आईजीएम के मेडिकल सुपरिटेंडेंट राजेश मोरे ने दखल दिया और महिला को भर्ती कराया गया। मोरे ने बताया कि मुझे रात करीब 10 बजे इसके बारे में पता चला था। और जैसे ही मुझे इसकी जानकारी मिली मैंने महिला को भर्ती कराने की व्यवस्था कराई।